असम में पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके हुई है गैंडों की जनगणना: वन मंत्री

Daily news network Posted: 2018-04-06 07:59:44 IST Updated: 2018-04-06 10:21:26 IST
असम में पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके हुई है गैंडों की जनगणना: वन मंत्री
  • असम की राज्य वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा ने जनगणना के बाद सामने आई गैंडों की बढ़ी हुई संख्या पर असंतोष की रिपोर्टों को नकार दिया है।

गुवाहाटी

असम की राज्य वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा ने जनगणना के बाद सामने आई गैंडों की बढ़ी हुई संख्या पर असंतोष की रिपोर्टों को नकार दिया है। वन मंत्री ने कहा कि राज्य के चार संरक्षित क्षेत्रों में गैंडों की जनगणना एक पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से की गई थी। गैंडों पर आयी रिपोर्टों को नकारने के बाद, ब्रह्मा ने बुधवार को साफ किया की यह आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं था।

 

 



 इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में हुई है। ब्रह्मा ने कहा, पिछले कुछ दिनों में मैंने गैंडों की संख्या पर सवाल उठाती हुई कई चर्चाएं और रिपोर्टें देखी हैं। मैं यह साफ करना चाहती हूं कि वन मंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान यह जनगणना पूरे पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके हुई है और जो नतीजे सामनें आए हैं, उनकी निगरानी तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा सख्ती से की गई हैं।

 

 



 बुधवार को वन मंत्री ने कहा कि राज्य में शिकार के कारण गैंडों की मौत काफी कम हो गर्इ है। इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया है कि 2013 में 40 गैंडाें की मौत हुर्इ थी। 2017 में 9 और 2018 में 2 गैंडों की मौत हुर्इ है। बता दें कि पेश की गर्इ रिपोर्ट 31 मार्च 2018 को तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 72 गैंडों की मौत स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों के कारण हुर्इ थी। इसके अलावा 39 गैंडों ने बाढ़ में अपनी जान गवांर्इ थी। 21 सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए थे। जबकि 18 गैंडे टाइगर का शिकार हुए थे। हालांकि 2018 में तीन महीनों के अंदर 3 गैंडे टाइगर का शिकार बन चुके है। इसके अलावा इस साल 14 गैंडों की नेचुरल मौत हुर्इ हैं। वन मंत्री की रिपार्ट के मुताबिक 2012 तक 387 गैंडे प्राकृतिक कारणों, शिकार, बाढ़ , दुर्घटना आैर टाइगर का शिकार हुए है।

 

 


 गौरतलब है कि हाल ही में एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा असम में गैंडों की हुई हालिया जनगणना को लेकर बड़े और गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा था कि राजनीतिक लाभ उठाने के लिए गैर सरकारी संगठनों, वन अधिकारियों औऱ नेताओं ने मिलकर कांजीरंगा नैशनल पार्क में गैंडों की संख्या के साथ हेर-फेर किया है।

 

 



उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आैर वन अधिकारियों का लक्ष्य 2020 तक 3000 तक बढ़ाना था। इसलिए गैर सरकारी संगठन, वन अधिकारी आैर राज्य के नेता एेसा कर रहे है। भबेन ने आेरंग को छोड़कर बाकी वाइल्ड लाइफ पार्क के गैडों की संख्या का 2016- 2017 का सही आंकड़ा जानने के लिए दो आरटीआर्इ भी दाखिल की थी।