बीजेपी शासित इस राज्य में एक झटके में लगे पांच हजार स्कूलों पर ताले, जानिए क्यों

Daily news network Posted: 2019-08-08 10:09:39 IST Updated: 2019-08-08 10:09:39 IST
बीजेपी शासित इस राज्य में एक झटके में लगे पांच हजार स्कूलों पर ताले, जानिए क्यों

असम में पिछले महीने आई भयंकर बाढ़ ( Assam Flood ) ने राज्य की सरकारी स्कूलों को काफी प्रभावित किया है। बाढ़ की चपेट में आए लगभग पांच हजार प्राथमिक और सेकेंडरी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद भी पढ़ाई शुरु नहीं हो पाई है। सबसे ज्यादा असम प्राथमिक स्कूलों पर पड़ा हैं। तीन अगस्त तक तैयार किए गए आधिकारिक आकलन के अनुसार कुल 4,995 अपर प्राथमिक और निम्न प्राथमिक स्कूलों को बाढ़ में नुकसान पहुंचा है। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार 35 प्राथमिक स्कूलें बाढ़ के पानी में बह गई हैं वहीं 107 पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं जबकि 4,551 आंशिक रुप से क्षतिग्रस्त हुई हैं।

 

 


93 करोड़ रुपए की जरूरत

दूसरी ओर 390 सेकेंडरी स्कूलें आंशिक रुप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसमें से 10 स्कूलें ग्रीष्मकालीन छुट्टी के बाद अब भी फिर से खुलनी बाकी है। इनमें छह मोरिगांव में और दो-दो बरपेटा और धेमाजी में हैं। मालूम हो कि सरकारी स्कूलों का ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 जुलाई से 31 जुलाई तक था। सरकार का अब भी यह पता लगाना बाकी है कि कितने प्राथमिक स्कूलों में कक्षाएं फिर से शुरु नहीं हुई हैं। क्षतिग्रस्त प्राथमिक और सेकेंडरी स्कूलों को ठीक करने के लिए अनुमानित 93 करोड़ रुपयों की जरुरत होगी। इस बीच शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासनों को निर्देश दिया है कि क्षतिग्रस्त स्कूलों की कक्षाएं जल्द से जल्द शुरु करने का इंतजाम करें।

 

 

बच्चों ने ली राहत शिविरों में शरण

असम सर्वशिक्षा अभियान ( Sarva Shiksha Abhiyan ) मिशन के निदेशक शमशेर सिंह ने कहा कि हमने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि वे सभी स्कूलों में पढ़ाई शुरु कराने का जरुरी इंतजाम करें। वे बह गई या पूरी तरह क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए दूसरा इंतजाम करें। यदि कहीं कक्षाएं शुरु नहीं हो पाई है तो उन स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित कर कमी को पूरा किया जाए। अधिकारी ने बताया कि बाढ़ के दौरान 302 प्राथमिक स्कूलों और 76 सेकेंडरी स्कूलों को बाढ़ प्रभावितों के रहने के लिए राहत शिविर के रुप में इस्तेमाल किया गया था। इनमें से कई राहत शिविर अब भी चल रहे हैं। आधिकारिक रिकार्ड के अनुसार प्राथमिक स्कूल के 9,735 और सेकेंडरी स्कूल के 8,684 विद्यार्थियों ने बाढ़ के चलते राहत शिविरों में शरण ली थी। इनमें से कइयों की किताबें और अन्य पढ़ाई की सामग्रियां बाढ़ में नष्ट हो गई। राहत शिविरों के रुप में इस्तेमाल की गई स्कूलो को ठीक करने के लिए शिक्षा विभाग को चार करोड़ रुपयों की जरुरत होगी।