जिस डॉक्टर ने अपना खून देकर बचाई थी जान, मजदूरों ने उसें ही उतार दिया मौत के घाट

Daily news network Posted: 2019-09-05 11:45:36 IST Updated: 2019-09-13 13:43:16 IST
जिस डॉक्टर ने अपना खून देकर बचाई थी जान, मजदूरों ने उसें ही उतार दिया मौत के घाट
  • असम में डॉक्टर देबेन दत्ता को मजदूरों की भीड़ ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया

गुवाहाटी

असम में हाल ही में हुई डॉक्टर देबेन दत्ता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दत्ता को टेओक टी एस्टेट चाय बागान में मजदूरों की भीड़ ने पीट—पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। डॉक्टर का कसूर सिर्फ इतना बताया गया है वो वहां पर स्थित अस्पताल में एक घंटा लेट पहुंचे थे। इससे गुस्साई भीड़ ने उनकी बुरी तरह से पिटाई कर दी और उन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह घटना पूरे असम समेत देशभर में सुर्खियां बनी हुई है।

 

इस घटना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी 24 घंटे का बंद रखा था, तथा सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम लेने का आश्वासन लेने की मांग की है। इसके बाद राज्य की सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने मामले पर संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि इससे पहले पुलिस इस घटना के आरोपियों के तौर पर 30 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

 

इस घटना को लेकर मृतक डॉक्टर देबेन दत्ता की पत्नी अपराजिता का कहना है कि उनके पति ने 1984 में इसी चाय बागान में काम करने वाले एक मजदूर को अपना खून देकर उसकी जान बचाई थी, लेकिन उन्होंने इसका भी ख्याल नहीं रखा और उनको मार दिया।

 

बताया गया है कि जिस दिन डॉक्टर पर हमला हुआ उस दिन सामरा माझी नाम का मजदूर घायल हो गया था जिसको अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। ऐसे में मजदूरों ने डॉक्टर को फोन किया तो वो 4 बजे पहुंचे। हालांकि उनका आने का समय 3 बजे बताया गया था, लेकिन उस दिन वो एक घंटा देरी से पहुंच पाए थे। इसी को लेकर मजदूर गुस्सा हो गए और डॉक्टर पर हमला कर दिया।

 

हालांकि असम के चाय बागानों में मजदूरों द्वारा हमला करने का यह पहला मामला नहीं हैं। इससे पहले भी 2012 में एक ऐसी ही घटना तिनसुकिया जिले के बोरदुमसा चाय बागान से सामने आई थी। यहां पर चाय बागान के मालिक मृदुल कुमार भट्टाचार्य और उनकी पत्नी को मजदूरों ने उनके ही घर में जिंदा जला दिया था। इसके बाद इसी साल मई में डिब्रूगढ़ जिले के डिकम चाय बागान में मजदूरों की भीड़ ने डॉक्टर प्रवीण ठाकुर को भी बुरी तरह से पीट दिया था।