कांग्रेस से बागी हुए इस नेता ने ही चुनावों में राहुल गांधी की पार्टी का किया सूपड़ा साफ, खिलाया कमल

Daily news network Posted: 2019-05-25 14:45:45 IST Updated: 2019-05-25 14:45:45 IST
कांग्रेस से बागी हुए इस नेता ने ही चुनावों में राहुल गांधी की पार्टी का किया सूपड़ा साफ, खिलाया कमल

लोकसभा चुनाव 2019 में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी को अगर किसी राज्य में सबसे बड़ी कामयाबी मिली तो वो है पहाड़ी और सामरिक रूप से बेहद अहम राज्य अरुणाचल प्रदेश। चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश की दो लोकसभा सीटों के अलावा विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने सभी पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की है और जल्द ही सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। एक वक्त तक उत्तर भारत की पार्टी माने जाने वाली बीजेपी ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में किला फतह कर इतिहास रच दिया। अरुणाचल प्रदेश में 'मिशन 60 प्लस 2' (60 विधानसभा और 2 लोकसभा) का लक्ष्य लेकर चल रही बीजेपी ने विधानसभा की 60 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करते हुए 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 4 सीटों से संतोष करना पड़ा।

 

 


वहीं एनडीए की सहयोगी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी ने भी इस पहाड़ी राज्य में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7 सीटों पर कब्जा जमा लिया। अरुणाचल में अगर बीजेपी के वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को 50.94 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 17.14 फीसदी वोट शेयर मिला। बीजेपी ने राज्य की दोनों लोकसभा सीटों पर भी भारी मतों से जीत दर्ज की है। साल 1962 से पहले अरुणाचल प्रदेश को नार्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) के नाम से जाना जाता था और यह असम का एक हिस्सा हुआ करता था। साल 1965 तक इस राज्य का प्रशासन विदेश मंत्रालय देखता था। साल 1972 में अरुणाचल प्रदेश केंद्र शासित राज्य बना और फिर 20 फरवरी 1987 को इसे भारत के 24 वें राज्य के रूप में मान्यता मिली। केंद्रशासित प्रदेश रहते हुए अरुणाचल प्रदेश में पहला विधानसभा चुनाव साल 1978 में हुआ जिसमें जनता पार्टी को जीत मिली और प्रेम खांडू थूंगन राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने।

 



इसके बाद वहां हुए 1980, 1984, 1990, 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने पूर्वोत्तर के इस राज्य पर एकछत्र राज बनाए रखा और अपने दबदबे को कम नहीं होने दिया। राज्य में अपना वजूद बनाए रखने के लिए बीजेपी को इस दौरान कड़ा संघर्ष करना पड़ा। साल 2014 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी इस राज्य में सिर्फ विधानसभा की 11 सीटों पर ही जीत पाई जबकि कांग्रेस ने 42 सीटों पर भारी बहुमत हासिल कर सरकार बना ली। अरुणाचल की राजनीति में बीजेपी को उस वक्त बड़ा उलटफेर करने का मौका मिला जब साल 2016 के सितंबर महीने में कांग्रेस के 43 विधायकों ने एक साथ कांग्रेस छोड़ दिया और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में शामिल हो गए।

 




राजनीतिक उलटफेर के लिए चर्चित अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर 3 महीने बाद दिसंबर में ही सियासत बदल गई और पीपीए के अध्यक्ष काहफा बेंगिया ने सीएम खांडू पर पार्टी विरोधी काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें और पांच दूसरे विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया।इसके तुरंत बाद राज्य के सीएम पेमा खांडू की अगुवाई में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) के 43 में से 33 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी ने इसके तुरंत बाद पहली बार राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया और पेमा खांडू ने विधानसभा अध्यक्ष तेजिंग नोरबू थोंकदोक के सामने विधायकों की परेड करा दी।

 

 

 

बीजेपी में शामिल होने के बाद और मुख्यमंत्री बनने के बाद साल 2016 में पेमा खांडू ने पत्रकारों से कहा था कि आखिरकार अरुणाचल प्रदेश में कमल खिल ही गया। अब राज्य के लोग नए साल और नई सरकार में नई सुबह देखेंगे। उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर इसे राज्य हित में लिया गया फैसला बताया था। आए दिन होने वाले राजनीतिक उथल-पुथल के लिए चर्चित अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले बीजेपी को करारा झटका लगा। 





20 मार्च 2019 को अरुणाचल प्रदेश में सरकार चला रही बीजेपी के गृह मंत्री समेत 8 विधायकों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया और यह सभी नेता नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में जाकर शामिल हो गए। एनपीपी में शामिल होने वाले नेताओं ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि बीजेपी की विचारधारा सही नहीं और यह धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं है। नेताओं ने बीजेपी पर वंशवादी होने तक के आरोप लगाए। हालांकि इस बड़े झटके के बाद 2019 का चुनाव बीजेपी ने पेमा खांडू के नेतृत्व में ही लड़ा और पीएम मोदी की 'एक्‍ट ईस्‍ट नीति' और अपनी लोकप्रियता की बदौलत उन्होंने पहली बार बीजेपी को ऐसी जीत दिलाई है।