APSC Scam: हाई कोर्ट ने निलंबित अधिकारियों को दिया झटका, नहीं मिलेगी पुन: नौकरी

Daily news network Posted: 2019-06-19 14:02:56 IST Updated: 2019-06-19 19:57:11 IST
  • गौहाटी उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की एक खंडपीठ ने असम लोक सेवा आयोग (एपीएससी) कैश फॉर जॉब स्कैम के निलंबित 43 दागी अधिकारियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर मंगलवार को सुनवाई की।

गुवाहाटी।

गौहाटी उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की एक खंडपीठ ने असम लोक सेवा आयोग (एपीएससी) कैश फॉर जॉब स्कैम के निलंबित 43 दागी अधिकारियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर मंगलवार को सुनवाई की।


 इस मामले पर अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने पहली सुनवाई में ही यह साफ कर दिया है कि पूर्व के दिशा-निर्देश के तहत निलंबित राजपत्रित अधिकारियों को पुनः नौकरी नहीं मिलेगी।


 उल्लेखनीय है कि एपीएससी भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार 43 राजपत्रित अधिकारियों ने पुनः नौकरी बहाल करने की मांग को लेकर गौहाटी उच्च न्यायालय में एक पीआईएल दाखिल किया था। न्यायालय में मंगलवार को पहली सुनवाई हुई।


 इस मामले में राज्य सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह और नलीन एस कोहली ने पैरवी की। वरिष्ठ अधिवक्ता नलिन एस कोहली ने मंगलवार को सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व में दिए गए फैसले के तहत किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार में निलंबित राजपत्रित अधिकारियों की नौकरी पुनः बहाल नहीं की जा सकती।


 उल्लेखनीय है कि असम सरकार द्वारा एपीएससी भ्रष्टाचार मामले की पैरवी करने के लिए उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता मनिंदर सिंह को तीन करोड़ रुपये देने की बात सामने आई है।


 ज्ञात हो कि पीआईएल दाखिल करने वाले गिरफ्तार 43 राजपत्रित अधिकारियों ने एपीएससी के पूर्व चैयरमैन राकेश पाल एवं उनके सहयोगियों को पैसे देकर एपीएससी की नौकरी प्राप्त की थी। इस मामले के भंडाफोड़ वर्ष 2016 में प्रकाश में आया था। उसके बाद एक-एककर 43 राजपत्रित अधिकारी इस मामले में गिरफ्तार हुए। इस मामले में राकेश पाल समेत कुल 70 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। जिसमें राजपत्रित अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हैं।


 उल्लेखनीय है 2016 में डिब्रूगढ़ पुलिस के प्रयासों से करोड़ों रुपए के एपीएससी कैश फॉर जॉब घोटाला सुर्खियों में आया था। डिब्रूगढ़ से एक इंजीनियर नब कांत पातीर को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह एक महिला डॉक्टर को एपीएससी की नौकरी दिलाने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार हुआ था।