अब इस राज्य में भी नहीं मिलेगी शराब, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

Daily news network Posted: 2018-05-15 10:42:19 IST Updated: 2018-05-25 14:07:55 IST
अब इस राज्य में भी नहीं मिलेगी शराब, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला
  • त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव इन दिनों अपनी बयानबाजी से सुर्खियों में हैं। हालांकि अब वे मन की शांति की तलाश में है।

अगरतला।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव इन दिनों अपनी बयानबाजी से सुर्खियों में हैं। हालांकि अब वे मन की शांति की तलाश में है। एक चैनल से बातचीत में देब मैं हर रोज सुबह ध्यान लगाने की योजना बना रहा हूं। इससे सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी, जिससे मुझे बेहतर तरीके से सेवा करने में मदद मिलेगी। हालांकि देब ने इस ओर इशारा किया कि वह भविष्य में शायद शराब पर बैन लगा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं त्रिपुरा को नशा मुक्त बनाना चाहता हूं। 

 

 

 

उन्होंने कहा कि अगर आप सकारात्मक अंदाज में सोचते हैं तो अपने आप आपकी ओर से किए गए काम सकारात्मक होते हैं। मैं हाल ही में प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी की ओर से आयोजित किए गए कार्यक्रम में शामिल हुआ और उसके बाद ही मैंने हर दिन योग और ध्यान लगाने का फैसला लिया ताकि मैं अपने भीतर ऊर्जा, शांति और अंदरूनी शक्ति प्राप्त कर सकूं। उन्होंने दावा किया कि इसका मकसद लोगों की भलाई है। देब ने कहा कि मुझे त्रिपुरा के लोगों ने चुना है और अब यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उनकी सेवा बेहतर तरीके से करूं।

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेहतमंद जीवनशैली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री सिर्फ  चार घंटे सोते हैं और बाकी समय में वह भारत के लिए कठिन मेहनत करते हैं। यह सिर्फ ध्यान और योग के कारण ही संभव है, जिस तरह की सकारात्मक ऊर्जा उनमें है वह प्रशंसा योग्य है। हम इस बात को लेकर खुश हैं कि वह योग को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में प्रचारित कर रहे हैं। बहरहाल मैंने योग को अपने राज्य के सारे स्कूलों में शामिल करने का निश्चिय किया है।


 

अपनी विकास की योजना और सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर देब ने कहा कि मेरा सपना है नए त्रिपुरा के साथ एक शांत समाज का निर्माण, ड्रग्स, शराब और महिलाओं के खिलाफ  अत्याचार त्रिपुरा की सबसे बड़ी समस्याए हैं और मैंने इनका सफाया करने के लिए चुनौती को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरी चुनौती है उन युवाओं को वापस प्रदेश में लाना जो विकास और नौकरी के मौके न होने के कारण बाहर चले गए। जनता दरबार मेंए एक युवा जो चेन्नई में एक आईटी कंपनी में (1 लाख रुपये सैलरी के साथ) काम कर रहा था। उसने मुझे कहा कि वह अपने घर लौटना चाहता है और अगर उसे वहां 25 हजार से कम की सैलरी भी मिले तो मंजूर होगी। मुझे यह रवैया बहुत पसंद आया। उसके जैसे कई हैं जो वापस लौटना चाहते हैं। इसलिए यह मेरी जिम्मेदारी है कि उन्हें यहां नौकरी मुहैया कराई जाए।