मौलाना के बिगड़े बोल, असीमानंद को बताया भगवा आतंकी, सरकार पर साधा निशाना

Daily news network Posted: 2018-04-17 12:49:37 IST Updated: 2018-04-17 13:01:34 IST
मौलाना के बिगड़े बोल, असीमानंद को बताया भगवा आतंकी, सरकार पर साधा निशाना
  • एआईयूडीएफ प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने मक्का मस्जिद विस्फोट कांड में आरोपित लोगों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार देने को लेकर एनआईए की तीखी आलोचना की

गुवाहाटी।

एआईयूडीएफ प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने मक्का मस्जिद विस्फोट कांड में आरोपित लोगों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार देने को लेकर एनआईए की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी एजेंसी की इस नाकामी से आतंकवाद के खिलाफ अभियान में बाधा आएगी। अजमल ने अपनी प्रतिक्रिया एक ट्वीट के जरिए दी। उन्होंने इसके पीछे सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा किया। वहीं अजमल के बयान के बारे में एआईयूडीएफ सचिव हैदर हुसैन बोरा ने मीडिया को बताया। 


 



 



राज्य जमीयत के नेता अजमल के मुताबिक इससे पहले समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा कर्नल पुरोहित को आतंकवाद में शामिल होने के प्रमाण के बावजूद साजिश के तहत सरकार ने बचने का अवसर दिया। इस बार एनआईए ने मक्का मस्जिद विस्फोट के सिलसिले में पकड़े गए तमाम लोगों के खिलाफ सबूत पेश नहीं किए। बयान में कहा गया है कि 18 मई 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट में एक गेरुवा आतंकवादी संगठन के शामिल होने के प्रमाण पाए गए थे। उसके आधार पर आंध्रप्रदेश पुलिस की ओर से गिरफ्तार सभी आरोपियों को स्थानीय अदालत ने जेल भेज दिया था। अजमल ने कहा कि उन सबको अब सबूत नहीं होने की बात कर एनआईए की अदालत ने हिरा करने का आदेश दिया है। मौलाना अजमल ने मांग की है कि भारत सरकार पहले के तमाम प्रमाणों के आलोक में इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएग, तभी आतंकवाद के खिलाफ उसकी लड़ाई को और ताकत मिलेगी। 


 

 

मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में पांचों आरोपी बरी 

हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए ) की विशेष अदालत ने वर्ष 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट से जुड़े मामले में आज सभी पांचों आरोपियों को बरी कर दिया। इस बीच एनआईए ने कहा है कि विशेष अदालत के इस फैसले को वह उच्च न्यायालय में चुनौती देगी। विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भरत बाबू और राजेेंद्र चौधरी को बरी कर दिया। 


 

गौरतलब है कि 18 मई 2007 को नमाज के दौरान ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में विस्फोट में नौ लोग मारे गए थे और 58 अन्य घायल हुए थे। स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच के बाद मामला केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई ने एक आरोपपत्र दाखिल किया और इसके बाद 2011 में सीबीआई से यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए ) को सौंपा गया। 


 

इस धमाके में स्वामी असीमानंद समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। बाद में इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। आरोपियों में स्वामी असीमानंद, देवेंदर गुप्ता,लोकेश शर्मा (अजय तिवारी),लक्ष्मण दास महाराज,मोहनलाल रातेश्वर,राजेंदर चौधरी, भारत मोहनलाल रातेश्वर, रामचंद्र कलसांगरा (फरार),संदीप डांगे (फरार), सुनील जोशी (मृत)शामिल थे। इस मामले में अब तक कुल 226 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे और अदालत में 411 दस्तावेज पेश किये गये।