अबतक नहीं मिला लापता विमान के बारे में कोई सुराग, सामने आई हैरान करने वाली सच्चाई

Daily news network Posted: 2019-06-08 18:30:30 IST Updated: 2019-06-09 17:03:44 IST
  • एक तरफ तो भारत दुनिया में अपनी तगड़ी साख बनाने के लिए और आतंकवादियों के छक्के छुड़ाने के लिए वायु सेना को मजबूत करने में लगा है, वहीं दूसरी और नजर डाले तो हाल ही में अरूणाचल प्रदेश में लापता वायु सेना के विमान ए एन-32 अचानक गायब हो गया है।

एक तरफ तो भारत दुनिया में अपनी तगड़ी साख बनाने के लिए और आतंकवादियों के छक्के छुड़ाने के लिए वायु सेना को मजबूत करने में लगा है, वहीं दूसरी और नजर डाले तो हाल ही में अरूणाचल प्रदेश में लापता वायु सेना के विमान ए एन-32 अचानक गायब हो गया है। लापता एयरफोर्स के परिवहन विमान ए एन-32 की तलाशी का सिलसिला लगातार जारी है। आज विमान को गायब हुए छह दिन बीत चुके हैं लेकिन विमान के बारे में किसी तरह का कोई सुराग नहीं मिला है। आपको बता दें कि इस विमान ने 3 जून को आखिरी उड़ान भरी थी। वहीं दूसरी ओर एयरफोर्स ने ट्वीट कर ये जानकारी दी है कि उसने अपने सर्च अभियान में तेजी के साथ-साथ उसका दायरा और भी बड़ा कर दिया है। एयरफोर्स के विमान अब तक सौ घंटे से ज्यादा की उड़ान भर चुके हैं। सेना के मानव रहित यान के साथ-साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के उपग्रह कार्टोसेट तथा रिसेट भी दुर्घटना के संभावित क्षेत्र की लगातार तस्वीरें ले रहे हैं। इसके अलावा सेना तथा स्थानीय पुलिस की ग्राउंड टीमें तो पहले से ही खोज अभियान में जुटी हुई हैं।

 


 अब आपको बताते हैं इस विमान के गायब होने की कहानी....

 ए एन-32 विमान ने सोमवार को दिन में 12 बजकर 25 मिनट पर असम के जोरहाट से अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले स्थित मेचुका एडवांस लैंङिंग ग्राउंड के लिए उड़ान भरी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ए एन-32 के पायलट आशीष तवर की पत्नी संध्या ने विमान को रडार से गायब होते देखा था। संध्या उस वक्त एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूप में अपनी ड्यूटी कर रही थी जिसके बाद उन्होंने सबको इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक बजे के करीब इस विमान का नियंत्रण कक्ष और अन्य एजेन्सियों से संपर्क टूट गया। संपर्क टूटते ही और इसके अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचने पर तुरंत ही उसकी तलाश के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। आपको बता दें कि विमान में चालक दल सहित 13 वायु सैनिक सवार थे।

 

 


 वहीं दूसरी ओर लापता वायु सैनिकों के परिजनों का बुरा हाल है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से साउथ ब्लाक स्थित रक्षा मंत्री के कार्यालय में मुलाकात की है। सिंह ने उन्हें अभियान के बारे में सारी जानकारी दी और कहा कि सरकार विमान का पता लगाने के लिए हर कोशिश कर रही है।

 इस अभियान में सेना, नौसेना, इसरो तथा अन्य एजेन्सियों के बाद अब दिन-रात चलाए जा रहे तलाशी अभियान में सेना के मानव रहित यानों की भी मदद ली जा रही है। अभियान के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें 4 एमआई-17 हेलिकॉप्टर, उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर, दो सुखोई विमान, एक परिवहन विमान सी-130 और सेना के एक मानवरहित यान को लगाया गया है।

 

 



अगर इतिहास के पन्नों को उठाकर देखें तो ए एन-32 विमान पहले भी कई बार हादसों का शिकार हो चुका है। ए एन-32 विमान का सबसे भयानक हादसा 22 जुलाई 2016 को उस वक्त हुआ था जब चेन्नई के ताम्बरम हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाला यह विमान पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर उड़ान के दौरान लापता हो गया था। उस वक्त उस विमान में 29 लोग सवार थे और उस हादसे के बाद इसके बारे में कोई सुराग नहीं मिला। उससे 10 वर्ष पहले 2009 में भी अरूणाचल प्रदेश में एक ए एन-32 विमान लापता हो गया था। उस वक्त उस विमान में भी 13 लोग सवार थे। उससे भी पहले वर्ष 1999 में दिल्ली में ए एन-32 विमान दुर्घटना में 21 लोगों की मौत हो चुकी थी। सोवियत दौर का ये एयर क्राफट् 1980 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। इसे लगातार अपडेट किया जाता रहा है लेकिन ये विमान अपडेटेड का हिस्सा नहीं था।