शिवसेना और टीडीपी के बाद एजीपी ने भी दिया भाजपा को तगड़ा झटका

Daily news network Posted: 2018-03-09 17:35:06 IST Updated: 2018-03-09 17:35:06 IST
शिवसेना और टीडीपी के बाद एजीपी ने भी दिया भाजपा को तगड़ा झटका
  • 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। शिवसेना पहले ही एनडीए से अलग हो चुकी है।

गुवाहाटी।

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। शिवसेना पहले ही एनडीए से अलग हो चुकी है। टीडीपी भले ही एनडीए में अभी भी शामिल हो लेकिन उसके दो मंत्री मोदी सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं। असम में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल दलों के बीच भी दरार आ चुकी है। भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद ने अपने रास्ते अलग कर दिए हैं। 

 

 

 

गुरुवार को असम गण परिषद ने आगामी पंचायत चुनाव और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव अकेले लडऩे की घोषणा की। असम गण परिषद के महासचिव और वरिष्ठ नेता रामेन्द्र नारायण कलिता ने कहा कि एजीपी ने आगामी पंचायत चुनावों में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लडऩे का फैसला किया है। कलिता ने कहा कि अकेले चुनाव लडऩे का फैसला लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव में असम गण परिषद 12 में से 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कलिता ने दावा किया कि एजीपी ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रंजीत दास के विभिन्न बैठकों में दिए बयानों के कारण लिया है। 

 

 

 

 

 

कलिता ने कहा है कि रंजीत दास ने विभिन्न बैठकों में दावा किया था कि भाजपा अपने दम पर आगामी चुनावों में हिस्सा लेगी और इसलिए एजीपी ने अकेले चुनाव लडऩे का फैसला किया है। आपको बता दें कि भाजपा ने अपने दम पर आगामी लोकसभा चुनाव लडऩे की पहले से ही तैयारी कर ली है। भाजपा का मकसद बीटीएडी इलाकों समेत राज्की  सभी सीटें जीतना है। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भाजपा सभी लोकसभा सीटें जीतने के लिए तैयारी कर रही है। 

 

 

 

 

 

भाजपा करीमगंज, धुबरी, सिलचर, कोकराझार, दिफु,कलियाबार और बारपेटा सीटें जीतना चाहती है। भाजपा ने इसके लिए कैंपेनिंग की जिम्मेदारियां भी तय कर दी है। धुबरी और करीमगंज में संसद सदस्य रामेन डेका इंचार्ज होंगे जबकि केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद  सिलचर, कोकराझार, दिफु, कलियाबार और बारपेटा में कैंपेनिंग इंचार्ज होंगे। 

 

 

 

 

 

इस फैसले के इफेक्ट के बारे में बोलते हुए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रंजीत दास ने कहा कि यह फैसला केन्द्र का है न कि राज्य का। जिन सीटों को जीतने का भाजपा का इरादा है वे या तो निर्दलीय उम्मीदवारों या विपक्षी दलों से संबंधित है। हालांकि बीपीएफ ने अभी तक इस मसले पर कोई बयान नहीं दिया है।