असम के बाद अब इस राज्य में लागू होगा NRC, मुख्यमंत्री ने कर दिया ऐलान

Daily news network Posted: 2019-09-16 08:50:44 IST Updated: 2019-09-16 08:54:33 IST
असम के बाद अब इस राज्य में लागू होगा NRC, मुख्यमंत्री ने कर दिया ऐलान
  • असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू होने के बाद इसको लेकर अब हरियाणा में सुगबुगाहट सामने आई है, असम के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को घोषणा की कि उनके राज्य में भी राष्ट्रीय नागरिक पंजी लागू की जाएगी।

चंडीगढ़/गुवाहाटी।

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू होने के बाद इसको लेकर अब हरियाणा में सुगबुगाहट सामने आई है, असम के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को घोषणा की कि उनके राज्य में भी राष्ट्रीय नागरिक पंजी लागू की जाएगी।

 


 खट्टर ने पंचकूला में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) एच एस भल्ला और पूर्व नौसेना प्रमुख सुनील लांबा से उनके आवासों पर मुलाकात करने के बाद कहा, 'हम हरियाणा में एनआरसी लागू करेंगे।'


 हाल में 31 अगस्त, 2019 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का फाइनल ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया। इसमें शामिल होने के लिए असम में 3.30 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से 19 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली।

 


 इससे पहले असम में 30 जुलाई, 2018 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का अंतिम ड्रॉफ्ट जारी कर दिया गया। इसमें शामिल होने के लिए असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली थी।


 

खट्टर ने अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी के 'महासंपर्क अभियान' के तहत इन दोनों से मुलाकात की। उन्होंने देश भर में एनआरसी को लागू करने का पहले भी समर्थन किया था। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश भल्ला से मिलने के बाद उन्होंने कहा, 'मैं महासंपर्क अभियान के तहत उनसे मिला। इस अभियान के तहत हम महत्वपूर्ण नागरिकों से मुलाकात करते हैं।'


 उन्होंने सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति भल्ला के बारे में कहा, 'वह एनआरसी पर भी काम कर रहे हैं और शीघ्र ही असम जायेंगे। मैंने कहा कि हम हरियाणा में एनआरसी लागू करेंगे और हमने भल्लाजी का समर्थन और उनके सुझाव मांगे।'

 

 

 

 क्या है एनआरसी?

 एनआरसी से पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। जिनके नाम इसमें शामिल नहीं होते हैं, उन्हें अवैध नागरिक माना जाता है। इसके हिसाब से 25 मार्च, 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है।

 


 असम पहला राज्य है जहां भारतीय नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए 1951 के बाद एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी की रात जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे।

 


 असम में बांग्लादेश से आए घुसपैठियों पर बवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी अपडेट करने को कहा था। पहला रजिस्टर 1951 में जारी हुआ था। ये रजिस्टर असम का निवासी होने का सर्टिफिकेट है। इस मुद्दे पर असम में कई बड़े और हिंसक आंदोलन हुए हैं। 1947 में बंटवारे के बाद असम के लोगों का पूर्वी पाकिस्तान में आना-जाना जारी रहा। 1979 में असम में घुसपैठियों के खिलाफ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने आंदोलन किया। इसके बाद 1985 को तब की केंद्र में राजीव गांधी सरकार ने असम गण परिषद से समझौता किया। इसके तहत 1971 से पहले जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे हैं, उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।

 


 हालांकि इस पर काम शुरू नहीं हो सका। 2005 में जाकर कांग्रेस सरकार ने इस पर काम शुरू किया। 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इसमें तेजी आई। इसके बाद असम में नागरिकों के सत्यापन का काम शुरू हुआ। राज्यभर में एनआरसी केंद्र खोले गए। असम का नागरिक होने के लिए वहां के लोगों को दस्तावेज सौंपने थे।