असम : परिवहन में भी लागु होगी 'एक राष्ट्र एक कर' प्रणाली

Daily news network Posted: 2018-04-20 12:01:29 IST Updated: 2018-04-20 12:01:29 IST
असम : परिवहन में भी लागु होगी 'एक राष्ट्र एक कर' प्रणाली
  • देश भर में तेजी से बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से चिंतित केंद्र सरकार जल्द ही 'एक राष्ट्र एक कर' का फार्मूला सड़क परिवहन के क्षेत्र में भी लागू करने जा रही है । ग्यारह राज्यों के परिवहन मंत्रियों की समूह बैठक के बाद जारी गुवाहाटी- घोषणा में खाका तय किया गया ।

गुवाहाटी

 देश भर में तेजी से  बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से चिंतित केंद्र  सरकार जल्द ही  'एक राष्ट्र एक कर' का फार्मूला सड़क परिवहन के क्षेत्र में भी लागू करने जा रही है । ग्यारह राज्यों  के परिवहन मंत्रियों की समूह  बैठक के बाद  जारी गुवाहाटी- घोषणा में खाका तय  किया गया । ओवर लोडिंग की बढ़ती समस्याओं के बीच रोचक ढंग से बैठक  में शामिल परिवहन मंन्नियों ने महसूस  किया कि ट्रकों को पहले  से  20 फीसदी अधिक लोड की अनुमति दी जाए।

 



परिवहन  मंत्रियों के समूह ने एक स्वर से एक राष्ट्र एक परमिट, इलेक्ट्रिक  वाहन और  तमाम पर्वतीय रराज्यों के लिए अलग से  सड़क परिवहन निति बनाने के प्रस्तावों को  ग्रहण कर किया  । । परिवहन मंत्रियों के समूह के चेयरमैन और राजस्थान के परिवहन व लोक निर्माण  मंत्री  यूनुस खान ने असम के परिवहन मंत्री  चंद्रमोहन पपटवारी की मौजूदगी में  इसका खुलासा किया  ।

 



सड़क सुरक्षा और सड़क परिवहन को बेहतर बनाने के उपाय खोजने व संबंधी नीतियां तय करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गुहाटी में आयोजित यह पहली और कुल मिलकर छटवीं बैठक थी। 

 



 

बैठक में शामिल राज्यों असम, मेघालय, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा , हरियाणा और राजस्थान  के परिवहन मंत्रियों  ने सड़क दुर्घटना आकड़ों  के विश्लेष्ण और इन्हे रोकने के गंभीर प्रयासों का संकल्प लिया  । इसकी संपरीक्षा और राष्टीय सड़क सुरक्षा नीति और संहिता (कोड) बनाने के लिए एक समिति का गठन भी किया गया ।

 




परिवहन  मंत्रियों के समूह ने माना  कि राष्टीय स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस  जारी करने के प्रक्रिया को और मज़बूत बनाने  की आवश्यकता है वर्ष 2030 तक सड़क दुदुर्घटनाओं  को  आधा करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया को इस  प्रकार स्वचालित कर दिया जाए कि उपयुक्त व्यक्ति को  ही लाइसेंस  हासिल सके ।

 




वाहन फिटनेस सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित केद्रों की स्थपना की जरूरत पर भी जोर दिया गया । राज्यों से अपेक्षा की गई कि निजी वाहनों पर कराधान को न्यूनतम किया जाए ताकि लोग कम शुल्क अदा करने के प्रयास  में किसी अन्य राज्य  में अपने वाहनों  को पंजीकरण नहीं कराने को  बाध्य न हों।

 





टूरिस्ट बसों के देश में कहीं भी बिना  किसी टैक्स झमेले के चलने की सुविधा  को ध्यान में रखते हुए सारे  देश में कंपोजिट वार्षिक शुल्क मॉडल पर सभी राज्यों के बीच सहमति बनी ।  बैठक के दौरान असम व पूर्वोत्तर  के अन्य राराज्यों सहित सभी पर्वतीय प्रदेशों  में   एक अलग परिवहन निति बनाने की   अत्यधिक जरूरत महसूस की गई ।