7वें वेतन आयोग की मांग, मणिपुर के सरकारी कर्मचारियों हड़ताल पर

Daily news network Posted: 2018-03-26 10:01:02 IST Updated: 2018-03-26 11:30:21 IST
7वें वेतन आयोग की मांग, मणिपुर के सरकारी कर्मचारियों हड़ताल पर
  • मणिपुर की एन बीरेन सिंह सरकार के 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू न करने के चलते राज्य के सरकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

इंफाल

7वें वेतन आयोग की सिफारिशेंलागू करने की मांग को लेकर मणिपुर के सरकारी कर्माचारी लगातार पांचवें दिन हड़ताल पर रहे।  सरकारी संगठनों ने राज्य सरकार को वेतन आयोग की घोषणा करने के लिए 21 मार्च की समय सीमा दी थी, जिसके बाद उन्होंने 22 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

 

 

 


बता दें कि बीते साल विधानसभा चुनाव से पहले जारी भाजपा के ‘विजन डॉक्यूमेंट’ में कहा गया था कि, अगर वे राज्य में सत्ता में आते हैं तो ये 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जिसके बाद अब सरकार को उसके इस वादे की याद दिलाते हुए ऑल मणिपुर ट्रेड यूनियन काउंसिल (एएमटीयूसी) और आल मणिपुर गवर्नमेंट एम्प्लाइज ऑर्गेनाईजेशन की एक जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी (जेएसी) ने 21 मार्च को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि जहां बाकी भाजपा नीत राज्यों में ये सिफारिशें लागू करने के लिए आधिकारिक घोषणा की जा चुकी है, वहीं मणिपुर सरकार केवल मौखिक आश्वासन दे रही है।

 

 


 मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जेएसी के महासचिव लैतोंजाम बिकेन ने कहा कि इस कमेटी ने अपनी 22 मांगों का एक चार्टर राज्य सरकार को सौंपा है, साथ ही इस मुद्दे को लेकर राज्य के वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और सरकार को रिपोर्ट बनाकर देने वाली फिटमेंट समिति के अलावा वे चार बार मुख्यमंत्री से भी मिले हैं।

 

 

 


 बताया जा रहा है कि राज्य के मुख्य सचिव ने इन संगठनों को कहा है कि फिटमेंट कमेटी द्वारा इन सिफारिशों के अनुरूप जरूरी वेतन की गणना करके सरकार को सौंप चुकी है, अब यह सरकार के हाथ में है कि वे कब इस पर अमल में लाएगी।  बिकेन ने रिपोर्टरों से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार उन्हें आश्वासन देते रहे कि वे जब प्रधानमंत्री मोदी 16 मार्च को मणिपुर आएंगे तो पर इस बारे में दबाव डालेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के ऐसे रवैये को देखकर ही कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का फैसला किया।

 

 


 वहीं इसी बीच विधानसभा में राज्य के वित्त मंत्री और उपमुख्यमंत्री वाय जॉयकुमार ने कहा, ‘अभी इन सिफारिशों को लागू करने की कोई तात्कालिक योजना नहीं है क्योंकि वेतन वृद्धि से (राज्य पर) 1,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च पड़ेगा। ’ वहीं मुख्यमंत्री द्वारा चेतावनी दिए जाने के बाद हड़ताली कर्माचारियों पर कोई असर नहीं दिखा और लगातार पांचवे दिन सरकारी काम-काज ठप रहा।

 

 


 मुख्यमंत्री ने शुक्रवार रात को कर्मचारियों को सोमवार तक काम पर लौट आने का आग्रह किया था और कहा था कि ऐसा न करने पर ‘सरकार को उनके कार्यो के लिए दूसरे व्यक्तियों की तलाश करनी पड़ेगी।’ सरकार की स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा, ‘सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद राज्य के 85,000 कर्मचारियों व 45,000 पेंशनधारियों को भुगतान करने से राज्य सरकार पर 15,00 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मणिपुर ज्यादातर केंद्र सरकार की उदारता पर निर्भर है। मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों को काम पर लौटने का आग्रह करते हुए कहा, ’31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले राशि को विभिन्न विकास कार्यो के लिए अनुमोदित करना है। ’