73 साल में स्कूल जाता है ये 'बच्चा', लगन देख स्कूल वाले भी हैं दंग

Daily news network Posted: 2018-04-12 13:00:10 IST Updated: 2018-09-08 15:33:46 IST
73 साल में स्कूल जाता है ये 'बच्चा', लगन देख स्कूल वाले भी हैं दंग
  • कहते हैं पढ़ने लिखने की कोई उम्र नहीं होती, अगर होनी चाहिए तो बस पढ़ने की चाह और इसी का अच्छा उदाहरण पेश किया है,

इंफाल

कहते हैं पढ़ने लिखने की कोई उम्र नहीं होती, अगर होनी चाहिए तो बस पढ़ने की चाह और इसी का उदाहरण पेश किया है मिजोरम के एक 73 साल के स्टूडेंट ने। चौंकिए नहीं, क्योंकि आज हम आपको एक ऐसे बुजुर्ग स्टूडेंट्स से मिलवाने जा रहें हैं, जिन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी अपनी पढ़ने की चाह को जिंदा रखा है और प्राइमरी स्कूल में दाखिला लिया। 

 



73 साल के इस स्टूडेंट का नाम लालरिंगथारा है। ये बुजुर्ग स्टूडेंट दिन में पढ़ाई करता है और रात में चौकीदारी का काम करता है। अपने जीवन में लालरिंगथारा ने बहुत ही संघर्ष भरे समय को देखा है, दो वक्त की रोटी के लिए पूरा जीवन निकाल दिया, लेकिन हजारों कठिनाई आने के बाद भी उनकी पढ़ने की चाह खत्म नहीं हुई। 



 


 

 बचपन में नहीं मिला स्कूल जाने का मौका


लालरिंगथारा का जन्म 1945 में भारत-म्यांमार की सीमा के एक गांव में हुआ। दूसरे बच्चों के साथ बचपन जी पाते, उससे पहले ही पिता का साया सिर से उठ गय, उस वक्त लालरिंगथारा 2 साल के थे। इसके बाद वह अपनी मां के साथ काम पर जाने लगे और जल्दी ही वे भी काम में अपनी मां का हाथ बंटाने लगे। उनकी उम्र के बाकी बच्चे खेलते थे, स्कूल जाते थे। वो मां के साथ खेती करते और घर पर भी अपनी मां की मदद करते थे। 



पढाई ना कर पाने के कारण करना पड़ा मुश्किल का सामना

 


पैसों की तंगी के कारण लालरिंगथारा ने चौकीदार की नौकरी की। वे दिन-रात में मेहनत करते बावजूद इसके स्कूल जाने का उनका सपना जिंदा रहा और यही कारण कि अपनी जीवन के 75 साल पार करने के बाद उन्होंने अपने सपने को पूरा करने की ठानी और गांव के एकमात्र प्राइमरी स्कूल में एडमिशन के लिए पहुंचे, लेकिन किसी को उनकी इस बात पर यकीन नहीं हुआ पर लालरिंगथारा अपनी बात पर अड़े रहे।


 उनकी जिद्द को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने उन्हें अगले साल आने को कहा क्योंकि स्कूल में उस समय एडमिशन बंद हो गए थे, लेकिन फिर अगले साल लालरिंगथारा लौटे और फिर से एडमिशन की मांग की, जिसके आगे स्कूल प्रशासन को झुकना पड़ा और आखिरकार लालरिंगथारा को एडमिशन मिल ही गया।



अंग्रेजी साहित्य पढ़ना चाहते हैं


लालरिंगथारा के स्कूल में पढ़ने के सपने के पीछे एक खास वजह है, यूं तो वो स्थानीय भाषा में लिख-बोल लेते हैं, लेकिन वो अंग्रेजी पढ़ना चाहते हैं। अंग्रेजी किताबें उन्हें बचपन से लुभाती रहीं और यहीं कारण है कि 73 की उम्र में वह अपना अंग्रेजी पढ़ने का सपना पूरा करना चाहते हैं।



स्कूल में करना पड़ा दिक्कतों का सामना

 

 शुरुआत में इसमें कई दिक्कतें आईं, बच्चे अपने दादा की उम्र के सहपाठी को अपनाने को तैयार नहीं थे। खुद लालरिंगथारा को इतने छोटे बच्चों के बीच पाठ दोहराते अजीब लगता था, लेकिन पढ़ने की ललक ने सारे संकोच को पीछे कर दिया। बच्चों के साथ लालरिंगथारा भी उसी फुर्ती के साथ पीटी करते  हैं और क्लास में टीचर के सवालों के जवाब देते हैं, लेकिन स्कूल खत्म होने के बाद वह रात में चौकीदारी का काम करते हैं और जब बाकी बच्चे सो रहे होते हैं तो वे अपना होमवर्क पूरा करते हैं।