पूर्वोत्तर के 70 एनजीओ पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक, केन्द्र से नोटिस जारी

Daily news network Posted: 2019-02-12 12:46:56 IST Updated: 2019-02-12 12:47:14 IST
पूर्वोत्तर के 70 एनजीओ पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक, केन्द्र से नोटिस जारी
  • असम सहित 72 गैर-सरकारी संगठनों पर कड़ा रूख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने वित्तीय जांच के आदेश दिए हैं।

असम सहित 72 गैर-सरकारी संगठनों पर कड़ा रूख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने वित्तीय जांच के आदेश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने सरकार की चेतावनी को नजरअंदाज कर चंदा लेने वाले 302 एनजीओ की मान्यता रद्द कर दी है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के 72 एनजीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें असम में 23 एनजीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम व अन्य 49 संगठनों को यह नोटिस भेजा गया है।

 


जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी को शक है कि ये संगठन कथित तौर पर दूसरे देशों से एनजीओ के नाम पर पैसा लेकर राष्ट्र विरोध गतिविधियों में उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच में सामने आया है कि कुछ एनजीओ को मिले विदेशी पैसे से राष्ट्र विरोधी गतिविधियां संचालित की जा रही है। जम्मू-कश्मीर भी एेसे की मामले सामने आए थे। इसके चलते केंद्र सरकार ने विदेशी विनिमय अधिनियम नियम 2011 के नियम 17(1) के तहत सभी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों जो एफसीआरआर 2010 के तहत पंजीकृत हैं या उन्हें इस अधिनियम के तहत विदेशी चंदा लेने की अनुमति प्रदान की जाती है, की जांच कराई थी। सरकार के मुताबिक, जांच से पता चला है कि पूर्वोत्तर राज्यों में एेसे कई एनजीओ अवैध लेन-देन का सीधा संबंध गैर-कानूनी कार्यों को अंजाम देने वाले संगठनों के साथ रहा है।

 


सरकार के खुफिया जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार सामाजिक एवं शैक्षिक संगठन की आड़ में कई एनजीओ विदेशी चंदे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद सरकार ने जब इनके दस्तावेज मांगे तो कई संगठन शक के दायरे में आ गए। ऐसे कई एनजीओ हैं जिनसे वित्तीय मामलों की जो जानकारी सरकार ने मांगी थी, लेकिन वह अभी तक नहीं मिली। यहां तक कि दर्जनों संस्थान एेसे मिले हैं, जिन्होंने सरकार के किसी भी पत्र का जवाब देना उचित नहीं समझा। एफसीआरए 2010 की धारा 14 के अनुसार, यदि कोई एनजीओ नियम के तहत विदेशी चंदे की जानकारी छिपाता है तो उसकी मान्यता रद्द हो सकती है। पिछले तीन साल में करीब पांच हजार एनजीओ के एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं।