नमक की ये झीलें देश को बनाती हैं 'Incredible India', एक बार जरूर करें सैर

Daily news network Posted: 2019-01-10 16:20:25 IST Updated: 2019-01-10 18:31:46 IST
  • खूबसूरती के मामले में भारत दुनिया भर में सबसे अलग है। यहां हर चीज में कुदरत के बेमिसाल रंग देखने को मिलते हैं।

नई दिल्ली।

खूबसूरती के मामले में भारत दुनिया भर में सबसे अलग है। यहां हर चीज में कुदरत के बेमिसाल रंग देखने को मिलते हैं। यही कारण है की इस देश को अतुल्य भारत के नाम से भी जाना जाता है। आज हम देश की ऐतिहासिक जगहों नहीं बल्कि नमक की झीलों के बारे में बात कर रहे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। बता दें भारत में कुल छह नमक की झीलें है। जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं।


 लोनार झील

 महाराष्ट्र के बुलढाणा जिला में स्थित इस झील को लोनार क्रेटर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस झील का निर्माण सदियों पहले उल्का पिंड गिरने के कारण हुआ था। इस वजह से इसे लोनार झील कहा जाता है। इस झील का खारा पानी 5 से 8 मीटर तक भरा हुआ है।


 सांभर झील

 राजस्थान में स्थित सांभर झील भी खारे पानी की झील है। यहां पर नमक की ज्यादा मात्रा होने के कारण 'सांभर नमक परियोजना' नामक प्रोजेक्ट चलाया जा रहा।


 चिल्का झील

 ओडिशा में स्थिक चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे बड़ी झील है। वैसे तो इस झील का पानी खारा है लेकिन खास बात यह है कि दिसम्बर से जून तक इस झील का पानी खारा रहता है लेकिन मानसून में ये झील मीठे पानी से भर जाती है।

 


 पुलिकट झील

 तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की बीच में स्थित पुलिकट झील, भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारी झील है। इस झील में अरनी नदी, कलंगी नदी और स्वर्णमुखी नदी यानि तीन नदीयों का पानी आता है। पर्यटक यहां पर खासतौर परपेलिकन (साइबेरियन पक्षी) को देखने के लिए आते हैं।


 पैंगोंग झील

 कुदरती नजारों से चारों तरफ से घिरा हुआ लद्दाख बहुत खूबसूरत है। वहां पर हर एक चीज देखने लायक है, इसके अलावा खारे पानी की झील यानि पैंगोंग झील भी लद्दाख की खासीयत है। यह दुनिया की सबसे ऊंची, लंबी और गहरी झील में से एक है। इसके किनारों पर नमक की परते साफ देखी जा सकती हैं।

 


 पचपदरा झील

 राजस्थान के बाड़मेंड़ में पचपदरा नाम के एक गांव में स्थित पचपदरा झील में भी नमक की मात्रा बहुत ज्यादा है। इस झील के बारे में लोगों का कहना है कि 400 साल पहले झील की आस पास दलदल को सुखाकर बस्ति को का निर्माण किया गया था।