कमर उज जमां से पहले असम के 40 मुस्लिम लड़के भी बने थे आतंकी

Daily news network Posted: 2018-04-11 16:53:07 IST Updated: 2018-04-11 16:53:07 IST
कमर उज जमां से पहले असम के 40 मुस्लिम लड़के भी बने थे आतंकी
  • आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने असम के कमर उज जमां के संगठन में भर्ती होने का दावा किया है। हिजबुल मुजाहिदीन ने सोशल मीडिया के जरिए यह दावा किया है।

गुवाहाटी।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने असम के कमर उज जमां के संगठन में भर्ती होने का दावा किया है। हिजबुल मुजाहिदीन ने सोशल मीडिया के जरिए यह दावा किया है। कमर उज जमां होजई जिले के जमुनामुख का रहने वाला है। हिजबुल ने जमां की एक तस्वीर भी पोस्ट की है, जिसमें लिखा हुआ है कि नए सदस्य ने हिजबुल मुजाहिदीन ज्वाइन किया है। तस्वीर के साथ कमर उज जमां का एड्रेस भी दिया गया है। 



हालांकि हिजबुल के इस दावे की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। इस बीच समाचार पत्र द असम ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि इस तरह के संगठनों में असम के युवाओं के भर्ती होने का यह पहला उदाहरण नहीं है। इस तरह के कई लोग पूर्व में गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें से एक, जो गिरफ्तारी के बाद असम मेडिकल कॉलेज व अस्पताल से भाग गया था,अभी भी लापता है।  असम ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 1998-99 में राज्य के करीब 40 युवा आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन(एचयूएम) में शामिल हो गए थे। ये सभी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भी गए थे। इन्हें असम के विभिन्न इलाकों से गिरफ्तार किया गया था।


 गुवाहाटी से चार संदिग्धों की गिरफ्तारी के चलते अन्य गिरफ्तार हुए थे। हालांकि तब हरकत उल मुजाहिदीन की असम यूनिट का चीफ मास्टर फखरुद्दीन जो बारपेटा का रहने वाला है, अभी भी गायब है। सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि जब अफगानिस्तान में अमरीका ने अल कायदा के खिलाफ बड़ा अभियान लॉन्च किया था तब फखरुद्दीन मारा गया। 


हालांकि इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं हो पाई। हरकत उल मुजाहिदीन का एक और हार्डकोर सदस्य नुरुल अमीन, जो नलबाड़ी का रहने वाला है, दिल्ली में एक विदेशी नागरिक के अपहरण के मामले में शामिल है,भी गायब है। 


नुरुल अमीन को गिरफ्तार किया गया था लेकिन वह गुवाहाटी मेडिकल कॉलेव व अस्पताल से भाग गया था। बताया गया कि वह बांग्लादेश भाग गया लेकिन वह कहां है इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। सूत्रों का कहना है कि बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल(बीटीसी) इलाके में 2012 में जातीय दंगों के बाद जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश(जेएमबी) ने असम में अपना बेस बनाने की कोशिश की थी। पश्चिम बंगाल के बर्दवान में एक्सिडेंटल ब्लास्ट के बाद यह तथ्य सामने आया था। हालांकि सुरक्षा बल असम में जेएमबी की कमर तोडऩे में कामयाब रहे और 50 लोगों को गिरफ्तार किया।