बाढ़ से 386 लोगों की मौत, कई राज्यों में तेज बारिश से बिगड़ सकते हैं हालात

Daily news network Posted: 2019-08-24 10:13:23 IST Updated: 2019-08-24 10:16:49 IST
बाढ़ से 386 लोगों की मौत, कई राज्यों में तेज बारिश से बिगड़ सकते हैं हालात
  • देश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी के तेजी से घटने के कारण राहत कार्य तेज कर दिया गया है तथा राहत केंद्रों में शरण लिये लोग अपने-अपने घरों को लौटकर पुनर्वास के काम में जुट गये हैं।

नई दिल्ली/गुवाहाटी।

देश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी के तेजी से घटने के कारण राहत कार्य तेज कर दिया गया है तथा राहत केंद्रों में शरण लिये लोग अपने-अपने घरों को लौटकर पुनर्वास के काम में जुट गये हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) राज्य की विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति तेजी से सामान्य होती जा रही है।

 


 इस बीच देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश और बादल फटने के कारण आई बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 386 पहुंच गयी है जबकि 23 अन्य लापता हैं। इस वर्ष बारिश एवं बाढ़ से उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं जबकि इससे पहले के दौर में हुई बारिश और बाढ़ से दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक सबसे गंभीर तौर पर चपेट में आये थे। हिमाचल में बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 63 लोगों तथा उत्तराखंड में 62 लोगों की मौत हुई है जबकि छह अन्य लापता हैं।

 


 दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण सबसे अधिक नुकसान हुआ है। केरल में अब तक 125 लोगों की मौत हुई जबकि 17 लोग अब भी लापता हैं, कर्नाटक में 62, गुजरात में 35, महाराष्ट्र में 30, ओडिशा में आठ तथा आंध्र प्रदेश में नाव पलटने से एक लड़की की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के बीच बिजली गिरने से कम से कम आठ लोगों की जान गयी हैं। इसबीच बाढ़ प्रभावित इलाकों में सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के दौरे तेज हो गये हैं। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को पंजाब के बाढ़ से प्रभावित गांवों में खाद्य उत्पादों और पेय पदार्थों के रूप में सहायता वितरित की तथा पंजाब की कांग्रेस सरकार को इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से आवंटित 474 करोड़ रुपये तुरंत जारी करने को कहा।

 


 फिल्लौर के मयोवाल गांव और बाद में सुल्तानपुर लोधी के तखिया और बारा जोध ङ्क्षसह गाँवों में उसकी अपील पर विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों की ओर से दान की गयी राहत सामग्री वितरित करने के बाद लोगों के साथ बातचीत में श्रीमती बादल ने कहा, 'मैं वाहे गुरु से आपकी भलाई के लिए प्रार्थना करती हूं। मुझे दु:ख है कि आपके घर और चूल्हा विनाशकारी बाढ़ से खतरे में पड़ गये हैं।'

 


 बादल ने कहा कि ऐसा लगता है कि पंजाब सरकार ने यह कहकर लोगों को गुमराह किया था कि उसने केंद्र से बाढ़ राहत पैकेज मांगा है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए केंद्र ने पंजाब को पहले ही 474 करोड़ रुपये दिए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को लोगों को यह बताना चाहिए कि उसने इस फंड से कितना पैसा खर्च किया है। उन्होंने कहा, 'स्पष्ट रूप से यह पैसा अभी भी लोगों को जारी नहीं किया गया है। एक बार जब यह जारी किया जाता है और अधिक धन की आवश्यकता होती है तो शिरोमणि अकाली दल खुद ही केंद्र सरकार से संपर्क करेगा।' केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है लेकिन राज्य सरकार कुछ नहीं कर पा रही। उन्होंने कहा, 'सामाजिक और धार्मिक संगठन मदद के साथ लोगों तक पहुंचने वाले पहले लोग हैं और वे अब भी लंगर की सेवा जारी रखे हुए हैं।'


 इस बीच उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आपदा राहत कार्य में लगे एक हेलीकॉप्टर को अचानक इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। पायलट को हल्की चोटें आने के साथ ही हेलीकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुआ है। यह हेलीकॉप्टर आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचा रहा था। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। उत्तरकाशी जिले के चिंवा गांव में आपदा ने भीषण तबाही मचाई थी, जिसके बाद से ही यहां रास्ते बंद है और रोजमर्रा की चीजों की किल्लत बनी हुई है। हेलीकॉप्टर से क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।


 शुक्रवार को भी एक हेलीकॉप्टर इस कार्य में लगा हुआ था, लेकिन टिकोची के पास बागीचों से सड़क तक सेब पहुंचाने वाली तारों को देखकर उन्होंने एमरजेंसी लैंडिंग की। समतल मैदान नहीं होने के कारण उन्हें नदी के किनारे पत्थरों पर ही लैंडिंग करनी पड़ी। गनीमत रही कि इस दौरान कोई हादसा नहीं हुआ। पायलट सुशांत जीना निवासी जबलपुर और को पायलट अजित सिंह, निवासी हरियाणा को आराकोट पहुंचाया गया, जहां से हेलीकॉप्टर के जरिए इन्हें देहरादून ले जाया गया। जिलाधिकारी डॉ आशीष चैहान ने बताया कि हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग क्यों कराई गई इसकी उनके पास सही रिपोर्ट नहीं आई है।

 


 गौरतलब है कि इन तारों की वजह से 21 अगस्त को भी क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था जो आपदा प्रभावित आराकोट न्याय पंचायत क्षेत्र के मोल्डी गांव में राहत सामग्री ड्रॉप कर वापस लौट रहा था और अचानक क्रैश हो गया। बगीचों से सेब की पेटियां मुख्य मार्ग तक सामान पहुंचाने के लिए लगाई गई ट्रॉली की तारों में हेलीकॉप्टर के उलझने से यह हादसा हुआ। इसमें सवार पायलट, को-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। पंजाब में जालंधर के जिला उपायुक्त वरिन्दर कुमार शर्मा ने सिंचाई और ड्रेनेज विभाग को निर्देश दिया कि सतलुज तटबंध में आई 350 फुट दरार को शनिवार तक पूरी तरह से बंद किया जाये। उन्होंने अतिरिक्त जिला उपायुक्त जसबीर सिंह के साथ मयोवाल में तटबंध की मरम्मत के कार्य का सर्वेक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शनिवार तक 350 फुट दरार को भर दिया जाये। इस अवसर पर ड्रेनेज विभाग के मुख्य कार्यकारी अभियंता दविन्दर सिंह ने जिला उपायुक्त को बताया कि 350 फुट चौड़ी दरार में से 170 फुट दरार को बंद कर दिया गया है और शनिवार सुबह तक शेष कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।

 

 

असम में बाढ़ से गई 90 लोगों की जान


असम में आई भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या 90 है। राज्य के धेमाजी, दरांग, बरपेटा, चिरांग, मोरीगांव, नागौन, होजाई, जोरहाट, चाराइदिओ तथा डिब्रूगढ में बाढ़ के पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है। राज्य के 209 गांवों के 1,21,909 लोग बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए हैं। असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक 3,765 लोग 23 रिलीफ कैंपों में शरण लिए हैं। बाढ़ से असम में 17,563,70 हैक्टेयर भू​मि उगी फसलें नष्ट हो गई हैं। जिन जिलों में यह नुकसान हुआ है उनमें धेमाजी, बरपेटा, मोरिगांव, होजाई, जोरहाट, छाराइदिओ तथा डिब्रूगढ शामिल है। हालांकि खबर है कि अभी भी जोरहाट में नेमातीघाट, डिब्रूगढ में बूरहिदिंग, शिवसागर में देसांग, गोलाघाट में धनसिरी तथा सोनितपुर में जय भराली नदिया खबरे के निशान से ऊपर बह रही है।

 

 

 


 मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी


मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती इलाकों, बिहार और झारखंड में अलग-अलग स्थानों पर अगले 12 घंटों के दौरान गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। तेज हवाएं, 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं दक्षिण-पश्चिम अरब सागर, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी, उत्तरी अरब सागर और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तटवर्ती इलाकों में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवायें चलने के आसार हैं जिसके कारण मछुआरों को अगले 12 घंटों के दौरान इन क्षेत्रों में उद्यम न करने की सलाह दी गयी है।

 


 दक्षिण पश्चिम मानसून तेलंगाना, तटीय कर्नाटक और केरल में सक्रिय है। यह उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और गुजरात क्षेत्र में कमजोर हुआ है। ओडिशा के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, झारखंड, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना, तमिलनाडु, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल, गांगेय पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, सौराष्ट्र और कच्छ तथा विदर्भ में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।