पिछले 2 साल में दहेज प्रथा की भेंट चढ़ी 353 महिलाएं

Daily news network Posted: 2018-04-02 19:51:38 IST Updated: 2018-06-06 14:44:47 IST
पिछले 2 साल में दहेज प्रथा की भेंट चढ़ी 353 महिलाएं
  • पूर्वोत्तर राज्य असम से दहेज प्रथा को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। राज्य गृह विभाग ने राज्य में वर्ष 2006 और 2018 के बीच बलात्कार, दहेज से संबंधित हिंसा और हत्या की शिकार हुईं महिलाओं को लेकर आश्चर्यजनक आंकड़ें जारी किए हैं।

पूर्वोत्तर राज्य असम से दहेज प्रथा को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। राज्य गृह विभाग ने राज्य में वर्ष 2006 और 2018 के बीच बलात्कार, दहेज से संबंधित हिंसा और हत्या की शिकार हुईं महिलाओं को लेकर आश्चर्यजनक आंकड़ें जारी किए हैं।


 विधायक कमला बासुमतारी द्वारा विधानसभा में पेश किए गए एक प्रश्न के बाद राज्य गृह विभाग ने बताया कि राज्य में वर्ष 2006 से मार्च 23, 2018 तक कुल 1,773 महिलाओं की हत्या की गई हैं।


 गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2006 से 2015 तक 1,253 महिलाओं की मौत दहेज से संबंधित घटनाओं में हुई हैं।


 वहीं पिछले दो वर्षों में 2016 से 23 मार्च 2018 तक असम में दहेज से संबंधित मामलों में 353 महिलाओं की मौत हुई है।


 आंकड़ों के मुताबिक, 2006 से 2015 तक कुल 37 महिलाएं बलात्कार के बाद हत्या कर दी गईं, जबकि 24 नाबालिग लड़कियों की भी बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। 2016 से 23 मार्च, 2018 के बीच अन्य 16 महिलाओं और 10 नाबालिग लड़कियां की भी इसी तरह हत्या कर दी गई है।


 साल 2006 से 2015 तक डायन बताकर शिकार के 71 मामले थे, जबकि पिछले तीन सालों में 9 महिलाओं की हत्या इस तरह की गई है।

 


 वहीं असम प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों में राज्य में महिलाओं के खिलाफ हुए 29,223 मामले दर्ज किए गए हैं। जिसमें बलात्कार के 3009 मामले, 717,106 शारीरिक उत्पीड़न और 9,108 मामले अपहरण के दर्ज हुए हैं।

 


 वहीं 9 मामलों में महिला के साथ बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई है। इस साल जनवरी तक राज्य में 8,335 घटनाएं महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और 4,314 बलात्कार के दर्ज किए गए हैं।

 



बता दें कि राज्य में 3000 बलात्कार के मामलों में सिर्फ 1786 मामलों में ही आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी है। गौर हो कि ये रिपोर्ट राज्य के राज्यपाल जगदीश मुखी को सौंपी गई है। साथ ही उनसे आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी की गई है।