21 लाख लोगों को सता रहा है डर, सरकार से की ये मांग

Daily news network Posted: 2019-07-20 21:04:28 IST Updated: 2019-07-20 21:04:28 IST
21 लाख लोगों को सता रहा है डर, सरकार से की ये मांग
  • असम में ड्राफ्ट एनआरसी से बाहर हुए 41 लाख लोगों में से 25 लाख ने केन्द्र को एक पिटीशन भेजी है। इसमें केन्द्र से री-वैरिफिकेशन की मांग की गई है। यह पिटीशन गृह मंत्रालय

गुवाहाटी।

नई दिल्ली। असम में ड्राफ्ट एनआरसी से बाहर हुए 41 लाख लोगों में से 25 लाख ने केन्द्र को एक पिटीशन भेजी है। इसमें केन्द्र से री-वैरिफिकेशन की मांग की गई है। यह पिटीशन गृह मंत्रालय के विचाराधीन है। 


ड्राफ्ट एनआरसी में कई सही लोगों के नाम छूट गए थे और कई फर्जी नाम रजिस्टर्ड हो गए थे। गृह मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह जानकारी दी है। गृह मंत्रालय ने एनआरसी के खिलाफ दाखिल दावों और आपत्तियों के नतीजों से असंतुष्ट लोगों की अपीलों के निस्तारण के लिए फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल्स के लिए मोडैलिटी तय की है। मंत्रालय ने मई में एक आदेश जारी किया था। 


इसमें फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल्स से कहा गया था कि वे उन मामलों पर चार माह के भीतर फैसला दें जो उन लोगों से संबंधित हो जिनके नाम एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर किए जा सकते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से बताया गया है कि सरकार की मंशा है कि एनआरसी के तहत कोई भी अवैध प्रवासी रजिस्टर्ड ना हो। फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल्स उन मसलों को हैंडल करते हैं जो भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं। 


जुलाई 2018 और इस साल जून में  प्रकाशित ड्राफ्ट सूचियों में करीब 41 लाख लोग बाहर हो गए। करीब 36 लाख लोगों ने उनको ड्राफ्ट सूचियों से बाहर किए जाने के खिलाफ दावे किए हैं। साथ ही दो लाख लोगों को शामिल किए जाने के खिलाफ भी आपत्तियां दर्ज कराई गई। विभिन्न एनआरसी केन्द्रों पर इन दावों और आपत्तियों की सुनवाई चल रही है। सरकार ने तय किया है कि इस प्रक्रिया के तहत जिनकी भी पहचान अवैध प्रवासी के रूप में होगी उन्हें डिपोर्ट किया जाएगा। 


शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने कहा कि हम दुनिया में शरणार्थियों की राजधानी बनने को अफॉर्ड नहीं कर सकते। पहला एनआरसी 1951 में प्रकाशित हुआ था, उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अपडेट किया जा रहा है, ताकि असम में रह रहे भारतीय लोगों को उन लोगों से अलग किया जाए जो 25 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेश से राज्य में अवैध रूप से घुसे हैं। उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया था जब पूर्व सैन्य अधिकारी मोहम्मद सनुल्लाह को ड्राफ्ट एनआरसी लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। 52 साल के पूर्व जवान को हिरासत केन्द्र में भेज दिया गया था। 


7 जून को गुवाहाटी हाईकोर्ट उसे जमानत दी थी। सरकार ने तय किया है कि एनआरसी एक्सरसाइज के तहत जिन अवैध प्रवासियों की पहचान होगी उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा लेकिन यह देखना होगा कि लाखों लोगों को कैसे बाग्लादेश भेजा जाता है क्योंकि पड़ोसी देश हमेशा से कहता रहा है कि उनका कोई भी नागरिक भारत में अवैध रूप से नहीं घुसा है। 


पूरी संभावना है कि पहले उन्हें असम में बने हिरासत केन्द्रों में बंद किया जाएगा। पहली ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होने के बाद तब के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ढाका का दौरा कर अपने समकक्ष को एक्सरसाइज की रूपरेखा पर ब्रीफ किया था।