म्यांमार की अदालत ने पहली बार उठाया ऐसा कदम, भारत के 24 विद्रोहियों को हो गई जेल

Daily news network Posted: 2019-05-19 10:45:54 IST Updated: 2019-05-19 10:48:45 IST
म्यांमार की अदालत ने पहली बार उठाया ऐसा कदम, भारत के 24 विद्रोहियों को हो गई जेल
  • म्यांंमार की एक निचली अदालत ने असम सहित पूर्वोत्तर भारत के कुछ अन्य राज्यों में सक्रिय विद्रोही संगठनों के कुल दो दर्जन कैडरों को दो-दो साल की जेल की सजा सुनाई है।

गुवाहाटी

म्यांंमार की एक निचली अदालत ने असम सहित पूर्वोत्तर भारत के कुछ अन्य राज्यों में सक्रिय विद्रोही संगठनों के कुल दो दर्जन कैडरों को दो-दो साल की जेल की सजा सुनाई है। म्यांमारी सेना तत्मादाव की ओर से बीतें महीनों के दौरान इन संगठनों के अपनी सीमा स्थित शिविरों पर हुए धावों के बाद वहां उठाया गया यह दूसरा बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

 


 यहां मिली जानकारियों के मुताबिक बुधवार को म्यांमार की हकमाती जिला अदालत ने असम और मणिपुर में सक्रिय उक्त संगठनों के सदस्यों को यह सजा सुनाई। ये उग्रवादी कैडर अल्फा, मणिपुर पीपुल्स आर्मी, कांग्लेई यावोल कन्ना लुप, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स रिवोल्युशनरी पार्टी आफ कांग्लेईपाक से संबंधित बताए गए हैं। पहली बार म्यांमार की किसी अदालत की ओर से वहां शरण लिए भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठनों के खिलाफ इस तरह की विधक कार्रवाई हुई बताई गई है।

 


 म्यांमारी सेना तत्मादाव ने इसके पहले विगत 29 जनवरी को सांगिग क्षेत्र के नगा-स्व-प्रशासनिक क्षेत्र में स्थित नगालैंड के विद्रोही संगठन एनएससीएन के मुख्यालय पर धावा बोल उसे तहस-नहस कर दिया था। उसने उस इलाके के तकरीबन सभी शिविर नष्ट कर डाले थे। हालांकि उस दौरान तमाम उग्रवादी सांगिग के ता गा इलाके से भागने में सफल रहे थे। लेकिन बाद में भी जारी सैनिक अभियान में म्यांमारी सेना तत्मादाव ने अल्फा और मणिपुर में सक्रिय विद्रोही संगठनों के कई सारे सदस्यों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की थी।

 

 


 इन गिरफ्तारियों के बाद तत्मादाव ने अनलाॅफुल एसोसिएशन के तहत अदालत में उक्त लोगों के खिलाफ मामला दायर किया था। यहां मिली जानकारी के मुताबिक मामले में छह सुनवाइयों के बाद जिला अदालत ने पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय व म्यामांर की सीमा में पकड़े गए कुल चौबीस उग्रवादियों को सजा सुनाई है। म्यांमारी मीडिया से हासिल जानकारी के मुताबिक तत्मादाव के दौरान एनएससीएन के पांच शीर्ष नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर भी उपरोक्त कानून के तहत पूर्वोत्तर भारत से आए उग्रवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया गया था।