तो अब 1971 को नहीं 1951 को माना जाएगा NRC का आधार ? इस विधायक ने दिया कुछ ऐसा बयान

Daily news network Posted: 2019-11-22 12:23:41 IST Updated: 2019-11-22 12:24:25 IST
तो अब 1971 को नहीं 1951 को माना जाएगा NRC का आधार ? इस विधायक ने दिया कुछ ऐसा बयान
  • होजाई के भाजपा विधायक शिलादित्य देव ने कहा है कि प्रकाशित नागरिक अद्यतन पंजी को मान लिया गया और विदेशियों की शिनाख्त का आधार वर्ष 1971 रहा तो अमस मुसलमान राज्य बन जाएगा।

गुवाहाटी

होजाई के भाजपा विधायक शिलादित्य देव ने कहा है कि प्रकाशित नागरिक अद्यतन पंजी को मान लिया गया और विदेशियों की शिनाख्त का आधार वर्ष 1971 रहा तो अमस मुसलमान राज्य बन जाएगा।

 


 

अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए विधायक शिलादित्य ने इस तरह से अपने उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक आने से असमिया भाषा, संस्कृति को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। विरोधी जो तर्क दे रहे हैं  उसका कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि, बांग्लादेश में सताए जा रहे हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और इसाई आदि समुदाय के लोगों को शरणार्थी के तौर पर देश में लाकर बसाया जाएगा। वे भारतीय मूल के ही लोग हैं। विदेश में अगर उनको सुरक्षा नहीं मिल रही है तो वे कहां जाएंगे।

 

 


 इसी क्रम में भाजपा विधायक ने गैर-सरकारी संगठन असम पब्लिक वर्क्स के प्रमुखत अभिजीत शर्मा के हवाले से बताया कि प्रकाशित एनआरसी के नाम पर 1600 करोड़ रुपए का कोई हिसाब नहीं दिया गया है। भाजपा विधायक ने कहा कि असमिया जाति की सुरक्षा के लिए 1600 करोड़ तो क्या तीस हजार करोड़ भी खर्च करने को सरकार तैयार है।

 

 

 


 उन्होंने प्रकाशित एनआरसी की खामियों को गिनाते हुए कहा कि इसमें फर्जी दस्तावेजों के साथ बांग्लादेशी मुसलमानों ने अपना नाम शामिल करा लिया है। जबकि स्थानीय मूल के निवासियों के नाम इसमें शामिल नहीं हुए हैं। ऐसे में अगर हाजेला के इस एनआरसी को मान लिया गया तो असम में स्थानीय मूल के निवासियों का नहीं बल्कि बांग्लादेशियों का दबदबा बढ़ जाएगा और असम मुसलमान राज्य बन जाएगा। इसलिए इन एनआरसी को कतई नहीं माना जाएगा। आधार वर्ष 1971 नहीं बल्कि 1951 होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय एनआरसी होगी और असम में भी उसी को ही माना जाएगा।