मिजोरम में मिली पानी बचाने की 1500 साल पुरानी धरोहर

Daily news network Posted: 2018-03-12 12:26:49 IST Updated: 2018-03-12 14:17:39 IST
मिजोरम में मिली पानी बचाने की 1500 साल पुरानी धरोहर
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मिजोरम की राजधानी आईजोल के पहाड़ों पर जल संचयन की नायाब तकनीक खोजी है

आईजोल।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मिजोरम की राजधानी आईजोल के पहाड़ों पर जल संचयन की नायाब तकनीक खोजी है। दरअसल ये तकनीक करीब 1500 साल पुरानी है।  आईजोल से 260 किलोमीटर दूर वांछिया में तीन से पांच किलोमीटर लंबे जल संचयन केंद्र मिले हैं। यह इलाका म्यांमार सीमा से महज चार किलोमीटर दूर स्थित है। एएसआई का दावा है कि पहाड़ों पर ऐसे टैंक विश्व में कहीं नहीं हैं। यहां सालभर पानी के भंडार रहते थे। ये भूमिगत टैंक एक मीटर तक गहरे हैं। कुछ टैंकों के मुहाने हाथी और मछली की आकृति वाले भी मिले हैं।

 

 


 यहां एएसआई के पुरातत्वविदों ने नंवबर में खुदाई शुरू की, यहां से मिले साक्ष्यों के सैंपल को जांच के लिए लखनऊ के बीरबल साहनी पेलियोबॉटनी इंस्टीट्यूट की प्रयोगशाला में भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट में यह साइट 500 ईसवीं की बताई गई। इसके साथ यहां से मिली वस्तुओं को फ्लोरिडा स्थित बेटा लैब में भी भेजा गया है।

 



एएसआई के अधिकारी और खुदाई के निदेशक डॉ. सुजीत नयन ने बताया कि पहाड़ों की घाटी में बने अद्भुत ऐतिहासिक पानी के टैंकों को लोगों के लिए भी खोला जाएगा। इस पूरे 10 किलोमीटर के ट्रैक को हेरिटेज पथ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बारे में एक प्रस्ताव मुख्यालय में भेजा गया है। डॉ. सुजीत के मुताबिक यहां के इतिहास को जानने के लिए खुदाई शुरू की गई थी। यहां की आर्कियोलॉजिकल साइट से मिली पुरातत्व वस्तुओं पर वर्ष 1750 के बाद कोई रिहाईश नहीं हुआ करती थी, लेकिन आज से 1500 साल पहले यानि 500 ईसवीं के आसपास यहां एक संपन्न सभ्यता रहा करती थी।