अरुणाचल के तवांग पर तैनात भारतीय जवानों से मिले Vicky Kaushal

Daily news network Posted: 2019-08-01 11:30:49 IST Updated: 2019-08-01 18:05:17 IST
अरुणाचल के तवांग पर तैनात भारतीय जवानों से मिले Vicky Kaushal

'उरी: द सर्जिकल स्‍ट्राइक' फिल्‍म के जरिए धमाका करने वाले बॉलीवुड स्टार Vicky Kaushal ने भारतीय सेना के साथ वक्त बिताया। इस दौरान वे काफी खुश नजर आए। बता दें कि Vicky Kaushal ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक फोटो भी शेयर की है। इस फोटो में Vicky Kaushal भारतीय सेना के जवानों के साथ नजर आ रहे हैं। आपको बता दें कि इन दिनों टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिहं धोनी भी भारतीय सेना के जवानों के साथ हैं। टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) महेंद्र सिंह धोनी आतंकवाद प्रभावित दक्षिण कश्मीर में बुधवार को सेना के साथ जुड़ गए, जहां वह अन्य सैनिकों की तरह गश्त, गार्ड ड्यूटी और बाकी काम करेंगे। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान धोनी 15 अगस्त तक 106 टीए बटालियन (पैरा) के साथ रहेंगे और सैनिकों की तरह काम करेंगे। 



 


वहीं Vicky Kaushal की बात करें तो अपनी फोटो के साथ कैप्शन दिया, 'खुश हूं जो अरुणाचल प्रदेश के तवांग की भारत-चीन सीमा पर 14,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात हमारी भारतीय सेना के साथ कुछ दिन बिताने का मौका मिला।' वर्क फ्रंट की बात करें तो Vicky Kaushal अब करण जौहर की मल्‍टीस्‍टारर फिल्‍म 'तख्‍त', 'भूत पार्ट वन- द हॉन्‍टेड शिप' और फील्‍ड मार्शल सैम मानेकशॉ की बायॉपिक में नजर आएंगे।  इस बायॉपिक को मेघना गुलजार डायरेक्ट करेंगी। 'राजी' के बाद यह मेघना के साथ Vicky Kaushal की दूसरी फिल्म होगी।  बता दें कि भारत-पाकिस्तान के 1971 के युद्ध के समय सैम मानेकशॉ भारतीय सेना के प्रमुख थे। हाल में एक इंटरव्यू में Vicky Kaushal ने कहा था कि फिल्म में सैम मानेकशॉ जैसे नेशनल हीरो का किरदार निभाना उनके लिए बेहद सम्मान की बात है। विकी ने यह भी बताया कि इस फिल्म में सैम के लुक के लिए उन्हें काफी ध्यान रखना होगा और इसकी शूटिंग साल 2021 से शुरू होगी। 



जानिए कौन हैं सैम मानेकशॉ

भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ का निधन 27 जून, 2008 को हुआ था। वह भारत के 8वें सेनाध्यक्ष थे और 1971 में उन्हीं के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को हराया था। इस युद्ध में 90000 सैनिकों को बंदी बनाया, जो एक ऐतिहासिक रेकॉर्ड है। उनका शानदार मिलिट्री करियर ब्रिटिश इंडियन आर्मी से शुरू हुआ और 4 दशकों तक चला, जिसके दौरान पांच युद्ध भी हुए। फील्ड मार्शल की रैंक पाने वाले वह भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे।  जब उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया तो उनको पिता के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने पिता के खिलाफ बगावत कर दी और इंडियन मिलिट्री अकैडमी, देहरादून में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा दी। वह 1932 में पहले 40 कैडेट्स वाले बैच में शामिल हुए।