असमिया फिल्म Village Rockstars का धमाका, सर्वश्रेष्ठ फिल्म का मिला पुरस्कार

Daily news network Posted: 2018-04-13 15:26:45 IST Updated: 2018-04-13 17:04:05 IST
  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस साल क्षेत्रीय फिल्मों का जलवा रहा और लगभग हर श्रेणी में अधिकतर पुरस्कार क्षेत्रीय फिल्मों ने ही जीते हैं।

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस साल क्षेत्रीय फिल्मों का जलवा रहा और लगभग हर श्रेणी में अधिकतर पुरस्कार क्षेत्रीय फिल्मों ने ही जीते हैं। वर्ष 2017 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा करते हुये जाने माने अभिनेता और फीचर फिल्म श्रेणी के जूरी प्रमुख शेखर कपूर ने कहा कि क्षेत्रीय फिल्में हिंदी फिल्मों से काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा Þहिंदी फिल्म का स्तर क्षेत्रीय फिल्मों के आसपास भी नहीं है। मुझे पता नहीं था कि लक्षद्वीप में भी फिल्में बनती हैं। पुरस्कार के लिए फिल्मों के चयन की 10 दिन की अवधि में मैं देश में बन रही फिल्मों का स्तर देखकर दंग रह गया।

 

 


एक बच्ची की कहानी है विलेज रॉकस्टार

असमी फिल्म विलेज रॉकस्टार्स ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित चार पुरस्कार जीते। असमी फिल्म विलेज रॉकस्टार्स को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया गया है। इसकी निर्माता-निर्देशक रीमा दास हैं। यह फिल्म एक सुदूर गांव के उन बच्चों की कहानी है जो रॉकस्टार बनने का सपना देखते हैं। आपको बता दें कि कान फिल्म उत्सव के हांगकांग गोज टू कान कार्यक्रम में फिल्मकार रीमा दास की मूवी विलेज रॉकस्टार को दिखाया गया था। यह फिल्म असम के एक छोटे से गांव की कहानी को दिखाता है। फिल्म में रीमा के गांव छाय्गओं की ही एक नन्हीं कलाकार हैं। फिल्म की कहानी एक गरीब, लेकिन एक साहसी लड़की की है जो एक गिटार खरीद कर संगीतकार बनना चाहती है। रीमा दास बताया था कि गांव में अपनी पहली फिल्म की शूटिंग करते समय इस फिल्म का विचार मेरे दिमाग में आया था। मैं इन अद्भुत बच्चों से मिली और तभी से बड़े पर्दे पर इन बच्चों की कहानी दिखाने के लिए उत्साहित हो गई। बता दें कि विलेज रॉकस्टार 10 वर्षीय धुनू की कहानी है, जिसकी देखरेख उसकी विधवा मां करती है। गरीबी में उसका पालन-पोषण करना और बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना, वह एक मजबूत शख्सियत वाली महिला थी। उसकी दृढ़ता समझौता न करने की प्रवृत्ति उसे और अधिक मजबूत बना देती है। 

 

 


सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन में बॉबी ने मारी बाजी

सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए 48 नाम आये थे। मातमागी मणिपुर - द फस्र्ट मणिपुरी फीचर फिल्म को सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ किताब का पुरस्कार दिया गया। लेखक बॉबी वाहेंगबाम ने मणिपुरी भाषा में बनी पहली फिल्म से पहले और बाद के युग की तुलना की है। इस दौरान क्षेत्रीय सिनेमा के निर्माण से जुड़ी चुनौतियों को पुस्तक में उकेरा गया है। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ आलोचनात्मक लेखन के लिए गिरिधर झा को पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा सुनील मिश्रा का विशेष उल्लेख किया गया है।

 



विनोद खन्ना को मिला दादा साहब फाल्के लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार

बंगला फिल्म नगर कीर्तन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता समेत चार पुरस्कार मिले। मुख्य रूप से तेलुगु में बनी फिल्म बाहुबली-2 और मलयालम फिल्म भयानक को तीन-तीन पुरस्कार मिले। दादा साहब फाल्के लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार हिंदी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता विनोद खन्ना को दिया गया। फीचर फिल्म श्रेणी में कुल 321 फिल्मों का आरंभिक चयन किया गया था और अंतिम दौर में 73 फिल्में थीं। 


 


मोख्र्या को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का पुरस्कार

लक्षद्वीप में बनी जसारी भाषा की फिल्म सिंजर को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म, बाहुबली-2 (तेलुगु) को सबसे लोकप्रिय फिल्म, मराठी फिल्म मोख्र्या को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का पुरस्कार दिया गया। राष्ट्रीय एकीकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मराठी फिल्म धप्पा को मिला। सामाजिक मसलों के लिए मलयालम की आलोरुक्कम को और पर्यावरण संरक्षण पर हिंदी फिल्म इरादा को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। हाल ही में दुनिया को अलविदा कहने वाली श्रीदेवी को फिल्म मॉम में उनके शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री तथा रिद्धी सेन को बंगला फिल्म नगर कीर्तन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया। 

 

 

 

 

सर्वश्रेष्ठ निदेशक का पुरस्कार जयराज को मिला

सर्वश्रेष्ठ निदेशक का पुरस्कार मलयालम फिल्म भयानकम के निदेशक जयराज को दिया गया। नॉन फीचर फिल्म के लिए 156 प्रविष्टियों में से 22 श्रेणियों में विजेताओं की घोषणा की गयी। पिया शाह निर्देशित वाटर बेबी को किसी निर्देशक की पहली फिल्म में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। प्रवासचा निबंधा के निर्देशक नागराज मंजुले को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और स्वोर्ड ऑफ लिबर्टी के लिए रमेश नारायणन को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार दिया गया।