लेना है रोमांच का मजा तो बालपक्रम वाइल्ड लाइफ जरूर जाएं

Daily news network Posted: 2018-04-22 16:39:50 IST Updated: 2018-04-22 16:39:50 IST
लेना है रोमांच का मजा तो बालपक्रम वाइल्ड लाइफ जरूर जाएं
  • बालपक्रम मेघालय का एक वाइल्ड लाइफ पार्क है। यह क्षेत्र बाघमारा से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

बालपक्रम मेघालय का एक वाइल्ड लाइफ पार्क है। यह क्षेत्र बाघमारा से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मेघालय के बालपक्रम में जंगली गाय, जंगली भैंसे, जंगली हाथी तो मिलते ही हैं, यहां बहुत सी बेशकीमती जड़ी बूटियां भी पाई जाती हैं। इनसे आयुर्वेदिक से लेकर एलोपैथिक दवाइयां बनाई जाती हैं।

 


 बालपक्रम इलाके की विविधता और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए ही केंद्र सरकार ने बालपक्रम नेशनल पार्क की स्थापना की है। कोई भी व्यक्ति सिब बारिविया से इस पार्क में आसानी से आ सकता है। सिब बारिविया, शिलांग बैलूत रानीकोर मोहेशखोला बाघमारा रोड पर है और यहां परिवहन के पर्याप्त साधन हैं।


 बालपक्रम से देश की खूबसूरती तो निहारी ही जा सकती है। विदेश यानी बांग्लादेश के हरे भरे मैदानों को देखना भी यहां से बेहद रोमांचक व अलग अनुभव देता है। बांग्लादेश का यह इलाका ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियों के कारण हमेशा पानी से भरपूर रहता है। हरा भरा रहता है।

 


 बालपक्रम का पठारी इलाका पत्थरों और चट्टानों से भरा है। बेहद सख्त है। गारो की जनश्रुति है कि बालपक्रम के पठार पर धर्मनिष्ठ लोगों की पुण्यात्मा वास करती है। इसी वजह से गारो इस पठार को बड़ी श्रद्धा से देखते हैं। बालपक्रम में मेधालय की विविध और रहस्यमयी गुफाओं के अलावा भी कुछ घूमने लायक स्थान हैं। इनमें से कुछ प्रमुखः


 चिडमैक

 यह बालपक्रम में एक काले रंग का तालाब है। गारो जनजाति की मान्यता है कि लोगों के मरने के बाद उनकी आत्मा इस तालाब में स्नान करती है और उसके बाद ही दूसरी दुनिया में जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मरने वाले व्यक्ति के पाप इसी तालाब में धुल जाते हैं और इसी कारण यहां का पानी काला हो गया है।


 दिक्कनी रिंग

 बालपक्रम के दक्षिणी क्षेत्र में महादेव गांव के पास एक भारी भरकम लेकिन चपटी चट्टान है। इस चट्टान की आकृति कुछ ऐसी है जैसे पलटी हुई नाव रखी हो। गारो जनजाति की धार्मिक मान्यता है कि कई साल पहले गारो प्रजाति के नायक डिकी रात में एक बोट बना रहे थे तभी एक मुर्गा बोला और डिकी का ध्यान भटक गया। उनका ध्यान भटकने के साथ ही आधी बनी नाव चट्टान में तब्दील हो गई। इस मान्यता का संदेश ये है कि सिर्फ आत्माएं ही रात में काम कर सकती हैं।