वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत ने तीन ब्रॉन्ज और एक सिल्वर के साथ कुल चार मेडल हासिल किया। चैंपियनशिप में पहली बार हिस्सा ले रही असम की जमुना बोरो ने 54 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। जमुना बोरो को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा।

जमुना को फ्रांस की वर्ल्ड नंबर वन सी क्रुवीलिर ने 5-0 से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। हालांकि जमुना ने देश के लिए दूसरा ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। असम राइफल में काम करने वाली जमुना ने गरीबी से लड़ते हुए बॉक्सिंग का अपना सपना पूरा किया है। साल 2017 इंडोनेशिया के लाबुआन में हुए प्रेसीडेंट्स कप में गोल्ड मेडल जीतकर वह पहली बार सुर्खियों में आईं थी।

बोरो केवल 10 साल की थी जब उनके पिता का देहांत हुआ था, तब से उनकी मां ने तीन भाई-बहनों को सब्जी बेचकर पाला है। उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है वहीं उनका भाई पूजा -पाठ का काम करके खर्चा चलाता है। जमुना और उनका परिवार बेलसिरि रेलवे स्टेशन के ठीक सामने रेलवे की जमीन पर अस्थाई तौर पर रहता था। जमुना कहती हैं, अकसर मैं अकादमी में लड़कों के साथ बॉक्सिंग ट्रेनिंग करती हूं और फाइट के दौरान मेरा लक्ष्य सामने वाले को हराने का होता है। उस समय दिमाग में यह बात बिलकुल नहीं आती कि रिंग में मेरे सामने कोई लड़का फाइट कर रहा हैं।

बोरो के गांव में कुछ बड़े लड़के वुशु खेला करते थे। पहले बोरो केवल खेल देखने के लिए जाती थी, लेकिन बाद में उन्होंने सीखने का मन बनाया। साल 2009 में उगलगुरी में हुए स्टेट वुशु चैंपियनशिप के दौरान साई के कोच की नजर उनपर पड़ी और राज्य बॉक्सिंग कैंप के लिए उनका चयन हो गया। इसके बाद वह असम राइफल में शामिल हुई और बॉक्सिंग जारी रखी।