भारत ने ओलंपिक में अब तक 4 मेडल पक्के कर लिए है। दो मेडल तो 4 अगस्त यानी बुधवार को ही आए। महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। दूसरी ओर रेसलर रवि दहिया (Ravi Dahiya) ने फाइनल में जगह बनाकर मेडल पक्का कर लिया। यानी एक दिन में दो मेडल। 125 साल के ओलंपिक इतिहास में ऐसा पहले भी कभी नहीं हुआ जब भारत ने एक दिन में दो मेडल पक्के किए हों। भारत ने अब तब एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीता है। कुश्ती में एक मेडल पक्का हो गया है।

दिन का पहला मेडल में महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने दिलाया। हालांकि वे सेमीफाइनल मुकाबला लड़कर हारीं, लेकिन भारत को एक ब्रॉन्ज मेडल दिला दिया। दूसरी ओर कुश्ती में रवि दहिया ने फाइनल में जगह बना ली है। ऐसे में एक मेडल और पक्का हो गया है। उन्होंने यह मुकाबला 2-9 से पिछड़ने के बाद जीता। उन्होंने कजाकिस्तान के सनायेव नूरिस्लाम को हराया। सनायेव वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

एक और युवा पहलवान 22 साल के दीपिका पूनिया हालांकि सेमीफाइनल में हार गए हैं। रवि और लवलीना दोनों का यह पहला ओलंपिक है और दोनों ही युवा खिलाड़ी हैं। यानी वे अगले दो-तीन ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। भारत के अब तक 4 मेडल पक्के हो गए हैं। यानी 2016 रियो ओलंपिक से हमने दाेगुने मेडल जीत लिए हैं। रियो में हमें सिर्फ दो मेडल मिले थे। बैडमिंटन में सिल्वर और कुश्ती में ब्रॉन्ज मेडल मिला था।

भारत ने 2008 बीजिंग ओलंपिक के बाद से गोल्ड मेडल नहीं जीता है। शूटर अभिनव बिंद्रा ने अंतिम बार 2008 में गोल्ड दिलाया था। टोक्यो में रेसलर रवि दहिया के अलावा विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा गोल्ड पर निशाना लगा सकते हैं। ओलंपिक के इतिहास में भारत ने सिर्फ 9 गोल्ड मेडल जीते हैं। यानी अभी भी दहाई गोल्ड मेडल का इंतजार है।