भारत-अर्जेंटीना के बीच टोक्यो ओलंपिक्स में हॉकी के सेमिफाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने भारतीय महिला टीम को 2-1 से शिकस्त देकर फाइनल में एंट्री ली। क्वार्टरफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त देकर टीम इंडिया पहली बार ओलंपिक के सेमिफाइनल तक पहुंची, लेकिन उसे कांटे के मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।

भारत की ओर से महज दूसरे ही मिनट में गुरजीत कौर ने पहला गोल दाग शानदार शुरुआत की। गुरजीत ने पहले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर भारत की आशाओं को उड़ान दी। गुरजीत के इस गोल की बदौलत भारतीय टीम 1-0 से आगे हो गई। 

आठवें मिनट में अर्जेंटीना को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन सलीमा टेटे के शानदार बचाव की बदौलत ये गोल में कन्वर्ट नहीं हो सका। हालांकि इसके बाद दूसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना की नोएल बैरियोन्यूवो ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। 

इसके बाद भारत को दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन ये गोल में कन्वर्ट नहीं हो सके। तीसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे नोएल बैरियोन्यूवो ने गोल में कन्वर्ट कर टीम को 2-1 से आगे कर दिया। 

भारत की चुनौती बढ़ती गई। चौथे क्वार्टर में भारत को अंतिम 10 मिनट में एक पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन ये गोल में तब्दील नहीं हो सका। इसे गोलकीपर मारिया ने रोक लिया।  

भारत के लिए अर्जेंटीना की चुनौती आसान नहीं थी। हालांकि अर्जेंटीना की महिलाओं ने कभी ओलंपिक हॉकी स्वर्ण पदक नहीं जीता है, लेकिन 2012 के लंदन और 2000 सिडनी खेलों दोनों में रजत पदक जीत चुकी है। 

दूसरी ओर भारत ने 3 बार के ओलिंपिक और 2 बार के वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद हौसले बुलंद कर लिए हैं। हालांकि ओलंपिक्स में अब भी पदक की उम्मीद बरकरार है। भारत का मुकाबला ब्रॉन्ज मेडल के लिए होगा।   

यदि भारतीय टीम कोई भी मेडल जीतने में सफल होती है, तो ये ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। उल्लेखनीय है कि 1980 मॉस्को ओलंपिक्स में भारत की महिला हॉकी टीम चौथे स्थान पर रही थी। यह ओलंपिक में उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 1980 में महिला हॉकी को ओलंपिक रोस्टर में पेश किया गया था।

यहां भारतीय ईव्स, जिसमें सैनी बहनों, लोरेन फर्नांडीस और प्रेम माया सोनिर में कुछ स्टार खिलाड़ी थे, उन्होंने ऑस्ट्रिया को 2-0 से हराया और इसके बाद पोलैंड पर 4-0 से जीत हासिल की। तीसरे मैच में उन्हें एक झटका लगा जब वे चेकोस्लोवाकिया से 1-2 के अंतर से हार गईं। वीमेन इन ब्लू ने फिर जिम्बाब्वे के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ दर्ज किया और अंत में सोवियत संघ से 1-3 से हारकर चौथे स्थान पर रही।