करीब तीन दशक के बाद एक बार फिर किसी महिला फुटबॉल खिलाड़ी को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार मिलेगा। इस पुरस्कार के लिए ओइनम बेबेम् देवी के नाम की घोषण 18 अगस्त को हुई है। पहली बार 1983 में शांति मलिक को अर्जुन पुरस्कार मिला था।

बेबेम् को भारतीय फुटबॉल के दुर्गा नाम से जाना जाता है। इन्होंने 1995 में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में डेब्यू किया था। इन्होंने फरवरी 2015 में शिलांग में एसएएफ खेल में स्वर्ण पदक जीता था।

वह भारत में महिला फुटबॉल के बारे में जागरुकता फैलाने में अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के साथ मिलकर काम कर रही हैं और वे फीफा लाइव योर गोल, इंडिया की स्काउट और ब्रांड एंबेसडर के रूप में सक्रिय हैं।

अपनी उपलब्धि के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह पुरस्कार फुटबॉलर बनने वाली लाखों लड़कियों को प्रेरित करेगा।

उसने कहा, 'यह भारतीय महिला फुटबॉल के लिए एक पुरस्कार है। मुझे उम्मीद है कि यह पुरस्कार समाज में सभी लड़कियों को प्रोत्साहित करने में मदद करेगा। 

उन्होंने अपने सहयोगियों, परिवार, टीम के साथी, कोच, एआईएफएफ और पूरे फुटबॉल बिरादरी को धन्यवाद दिया।

एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने अपनी उपलब्धि के लिए बेबेम् को बधाई दी। उन्होंने कहा बेबेम देश में सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा रही है। भारतीय महिला फुटबॉल में उनका योगदान असाधारण रहा है। वह पुरस्कार के हकदार हैं।

एआईएफएफ के महासचिव कुशाल दास ने बताया कि बेगमम कई युवाओं के लिए एक आदर्श मॉडल है। 'उन्होंने दो दशक से ज्यादा समय तक भारत के लिए खेले हैं और शीर्ष प्रदर्शन करने वाले हैं। वह सभी नवोदित महिला फुटबॉलरों के लिए एक आदर्श है।