दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 1500 मीटर में एशियाई खेलों में क्वालीफाई करने के लिए आयोजित की गई विशेष ट्रायल मे महिला धावक मोनिका चौधरी विफल रहीं। वह अंतत: एशियाई खेलों के लिए जकार्ता नहीं जा पाएंगी।


यह ट्रायल बुधवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में रखी गई थीं जिसमें मोनिका ने चार मिनट 33 सेकेंड का समय निकाला जो क्वालीफाई मार्क चार मिनट 16.88 सेकेंड से अधिक था।
मोनिका हालांकि इस निराश हैं और उन्होंने अपने एशियाई खेलों में हिस्सा न ले पाने का दोष भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) पर मढ़ा है।


दरअसल, मोनिका का कहना है कि उन्होंने गुवाहाटी में हुई इंटर स्टेट चैम्पियनशिप में चार मिनट 12 सेकेंड का समय निकाला था, जो एशियाई खेलों के क्वालीफाई मार्क के मुताबिक था, लेकिन इसके बाद भी उनकी भूटान में कैम्प में ट्रायल हुई जहां उन्हें संतोषजनक प्रदर्शन न करने का हवाला देकर बाहर कर दिया। मोनिका ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।


एएफआई ने हालांकि मंगलवार को एक बयान में कहा था कि मोनिका ने इंटर स्टेट चैम्पियनशिप में चार मिनट 12.44 समय के साथ रजत पदक जीता था जबकि एशियाई खेलों के लिए 15 अगस्त को भूटान में आयोजित चयन ट्रायल में उन्होंने चार मिनट 41.06 का समय लिया था। लेकिन एशियाई खेलों में हिस्सा लेने के लिए एएफआई ने चार मिनट 16.88 का समय तय किया था।


एएफआई ने न्यायालय को बताया कि चयन की पुष्टि के लिए कराए गए ट्रायल में उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था, इसलिए एशियाई खेलों के लिए उनके नाम पर विचार नहीं किया गया।


मोनिका ने बुधवार को ट्रायल के बाद आईएएनएस कहा, 'मैंने क्वालीफाई किया था तो मैं फिर क्यूं ट्रायल दूं। मुझे कहा गया कि आप कैम्प में नहीं हो इसलिए आपकी दोबारा ट्रायल होगी, लेकिन इन्होंने मुझे कैम्प में नहीं डाला। इसके बाद मेरा नाम भूटान में एशियाई खेलों के कैम्प में गया। वहां मेरी एक बार फिर ट्रायल हुई। 18 तारीख को नई दिल्ली में हुई बैठक में कहा गया कि मैंने ट्रायल में अच्छा नहीं किया। कायदे से मेरी ट्रायल होनी नहीं चाहिए थी क्योंकि मैंने गुवाहाटी में क्वालीफाई किया था।'


मोनिका ने कहा कि बुधवार को उनके लिए ट्रयाल देना काफी तानवपूर्ण रहा और स्थिति भी अनुरूप नहीं थी। उन्होंने कहा, 'मैं काफी थकी हुई थी। मेरे पेसर को भी काफी प्रताडि़त किया गया और उसे बाहर भेजने तक की धमकी दी गई। मैं कल भूटान से फ्लाइट से आई और आते ही सुनवाई में चली गई और फिर अपने घर बुंदेलखंड गई वहां से यहां आई। मैं काफी थकी हुई थी और ऐसे में मैंने ट्रायल दी।' मोनिका का कहना है कि कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनकी ट्रायल नहीं ली गई है और वह लोग एशियाई खेलों में हिस्सा ले रहे हैं।