मौजूदा विश्व चैंपियन मीराबाई चानू पिछले साल नवंबर में विश्व चैंपियनशिप में 48 किलो भारवर्ग में 194 (85 किग्रा+109 किग्रा) का भार उठा कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 196 किग्रा (86 किग्रा+110 किग्रा) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता था। यह राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है।


कई उपलब्धियों को अपने नाम करने वाली मणिपुर की चानू एक बार बहुत बड़ी निराशा हाथ लगी थी। जब वे ओलपिंक जैसे मुकाबले में अपना खेल पूरा ही नहीं कर पाईं थी। यह किसी भी खिलाड़ी के मनोबल को तोड़ने वाली घटना होती है।


साल 2016 में भारत की वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू के लिए ऐसा ही हुआ था। ओलंपिक में अपने वर्ग में मीरा सिर्फ़ दूसरी खिलाड़ी थीं जिनके नाम के आगे ओलंपिक में लिखा गया था 'डिड नॉट फ़िनिश'। जो भार मीरा रोज़ाना प्रैक्टिस में आसानी से उठा लिया करतीं, उस दिन ओलंपिक में जैसे उनके हाथ बर्फ़ की तरह जम गए थे। उस समय भारत में रात थीं, तो बहुत कम भारतीयों ने वो नज़ारा देखा।

सुबह उठ जब भारत के खेल प्रेमियों ने ख़बरें पढ़ीं तो मीराबाई रातों रात भारतीय प्रशंसकों की नज़र में विलेन गईं। नौबत यहां तक आई कि 2016 के बाद वो डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें हर हफ्ते मनोवैज्ञानिक के सेशन लेने पड़े। इस असफलता के बाद एक बार तो मीरा ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पिछले साल ज़बरदस्त वापसी की। वैसे 23 साल, 4 फ़ुट 11 इंच की मीराबाई चानू को देखकर अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है कि देखने में नन्ही सी मीरा बड़े बड़ों के छक्के छुड़ा सकती हैं।48 किलोग्राम के अपने वज़न से क़रीब चार गुना ज़्यादा वज़न यानी 194 किलोग्राम उठाकर मीरा ने पिछले साल वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। पिछले 22 साल में ऐसा करने वाली मीराबाई पहली भारतीय महिला बन गई थीं। 48 किलो का वज़न बनाए रखने के लिए मीरा ने उस दिन खाना भी नहीं खाया था। 8 अगस्त 1994 को जन्मी और मणिपुर के एक छोटे से गांव में पली बढ़ी मीराबाई बचपन से ही काफ़ी हुनरमंद थीं। बिना ख़ास सुविधाओं वाला उनका गांव इंफ़ाल से कोई 200 किलोमीटर दूर था।


बता दें कि मौजूदा विश्व चैंपियन मीराबाई इस साल मई से पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या से जूझ रही हैं। पिछले सप्ताह जब दर्द से आराम मिला, तो उन्होंने मुंबई में अभ्यास शुरू किया, लेकिन फिर से दर्द शुरू हो गया। इसलिए वे एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाएंगी। पीठ दर्द से परेशान मीराबाई ने इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन को पत्र लिखकर आराम देने का आग्रह किया था। वह ओलंपिक क्वालिफायर के लिए खुद को तैयार करना चाहती हैं।