एथलेटिक्स ट्रैक इवेंट में देश को पहली बार गोल्ड दिलाकर इतिहास रचने वाली हिमा दास अब स्टार बन चुकी हैं। हिमा ने AIFF अंडर-20 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खास बात यह कि इस दौड़ के 35वें सेकंड तक हिमा टॉप थ्री में भी नहीं थीं, लेकिन बाद में ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सभी को पीछे छोड़ दिया। रेस जीतने के बाद जब हिना ने गोल्ड मेडल लिया और सबके सामने राष्ट्रगान बजा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

रेस जीतने पर हिमा ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर मैं बहुत खुश हूं। मैं सभी देशवासियों और यहां पर मेरा उत्साह बढ़ाने वालों की आभारी हूं। हिमा ने यह रेस 51.46 सेकेंड में पूरी की। रोमानिया की एंड्रिया मिकलोस को सिल्वर और अमरीका की टेलर मैंसन को ब्रॉन्ज़ मेडल मिला। आपको बता दें कि हिमा दास ने इस उपलब्धि के साथ उस सूखे को भी खत्म कर दिया जो भारत के लेजेंड मिल्खा सिंह और पीटी उषा भी नहीं कर पाए थे।

हिमा दास से पहले भारत की कोई महिला या पुरुष खिलाड़ी जूनियर या सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड या कोई मेडल नहीं जीत सका था। हिमा दास से पहले सबसे अच्छा प्रदर्शन मिल्खा सिंह और पीटी उषा का रहा था। पीटी उषा ने 1984 ओलिंपिक में 400 मीटर हर्डल रेस में चौथा स्थान हासिल किया था।

इससे पहले बुधवार को हुए सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 52.10 सेकंड का समय निकालकर वो पहले स्थान पर रही थीं। पहले दौर की हीट में भी 52.25 समय के साथ वो पहले स्थान पर रही थी। बता दें कि हिमा का जन्म 9 जनवरी 2000 में हुआ। अभी उनकी उम्र 18 साल है। हिमा असम के नागांव जिले के ढिंग गांव में एक किसान की बेटी हैं। किसान के 6 बच्चों में सबसे छोटी बेटी है और पहले लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं और एक स्ट्राइकर के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थीं।