भारतीय धाविका 18 वर्षीय हीमा दास ने यहां चल रहे आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिलाओं की 400 मीटर रेस में स्वर्ण पदक हासिल किया है, जो विश्व मंच पर महिला वर्ग में भारत का पहला ऐतिहासिक ट्रैक स्वर्ण पदक है। असम की रहने वाली हीमा ने गुरूवार को इतिहास रच दिया और वह विश्व चैंपियनशिप में भारत को एथलेटिक्स स्वर्ण पदक दिलाने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गयीं। हीमा ने महिलाओं की 400 मीटर रेस के फाइनल में 51.46 सेकंड का सर्वश्रेष्ठ समय निकाला और पहले स्थान पर रहीं। इससे पहले पुरूष एथलीट नीरज चोपड़ा ने विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पोलैंड 2016 संस्करण में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। हीमा विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में ट्रैक पर भारत को स्वर्ण दिलाने वाली भी पहली खिलाड़ी बन गयी हैं। 

बता दें कि हिमा ने कभी भी एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने का सोचा नहीं था, वह तो लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं। इस दौरान एक शख्स ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उसकी जिद की वजह से वह ट्रैक पर उतर आईं और कड़ी मेहनत के बाद इतिहास रचने में कामयाब हुईं। दरअसल, वो शख्स कोई और नहीं उनके कोच निपोन दास हैं। उन्होंने हिमा को एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने की सलाह दी, लेकिन उनके परिवार वाले राजी नहीं हुए। आखिरकर कोच निपोन की जिद के आगे हिमा के परिजनों का झुकना पड़ा। इसके बाद हिमा ट्रैक पर अपनी काबिलियत साबित करने की जोर आजमाइश में जुट गईं।

पिछले साल जनवरी में कोच के तौर पर हिमा से जुड़े निपोन दास ने कहा कि उसका (हिमा का) आत्मविश्वास ही उसकी सफलता का आधार बना। वह अपनी प्रतिद्वंद्वियों की परवाह नहीं करती। हर दौड़ में उसका लक्ष्य बेहतर समय के साथ सर्वश्रेष्ठ को हरा देना है। उल्लेखनीय है कि हिमा अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों की 400 मीटर स्पर्धा में तत्कालीन भारतीय अंडर 20 रिकॉर्ड 51.32 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रही थीं। इसके बाद गुवाहाटी में हाल में राष्ट्रीय अंतर राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने 51.13 सेकेंड के साथ अपने इस रिकॉर्ड में सुधार किया था।