कोविड-19 महामारी की मार सरकारों के बजट पर कितनी भारी पड़ी है इसका अंदाजा राज्यों की ओर से उठाए जा रहे कर्ज के आंकड़े बता रहे हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में (07 अप्रैल से 03 मार्च तक) 28 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश मिलकर बाजार से कुल 7.14 लाख करोड़ रुपए का कर्ज उठा चुके हैं। यह कर्ज पिछले वित्त वर्ष की सामान अवधि की तुलना में 31 फीसद ज्यादा है। वित्त वर्ष 2019-20 में राज्यों की ओर से उठाया गया कर्ज 5.45 लाख करोड़ रुपए था। 

मध्य प्रदेश, झारखंड और सिक्किम ये तीन राज्य ऐसे हैं जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से ज्यादा कर्ज उठा चुके हैं। मध्य प्रदेश ने मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक कुल 38,100 करोड़ रुपए का कर्ज बाजार से उठाया है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह राशि 18,000 करोड़ रुपए की थी। इसी तरह झारखंड की ओर से मौजूदा वित्त वर्ष में बाजार से उठाई गई राशि 6,400 करोड़ रुपए की है, जो पिछले वित्त वर्ष में 3,000 करोड़ थी। सिक्किम ने 593 करोड़ की तुलना में कुल 1,231 करोड़ रुपए का कर्ज बाजार से उठाया है।

दो मार्च को हुए ऑक्शन में कुल 23,378 करोड़ रुपए जुटाने के लिए विभिन्न राज्यों की ओर से सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की गई। महाराष्ट्र और तेलंगाना को क्रमश: 250 और 200 करोड़ रुपए ज्यादा की बोलियां मिलीं, जबकि पंजाब को 135 करोड़ रुपए कम की बोलियां मिलीं। बॉन्ड की यील्ड यानी दिए गए कर्ज की ब्याज दर ज्यादातर राज्यों के लिए 7 फीसद से ऊपर हैं। सबसे महंगा कर्ज जम्मू और कश्मीर को 15 साल के लिए 7.24 से 7.29 फीसद पर मिल रहा है। इसके अलावा राजस्थान और कर्नाटक को मिलने वाले कर्ज की दर 7.25 के पास है। छोटी अवधि के कर्ज की ब्याज दर कम है। मध्य प्रदेश ने दो वर्ष के लिए 4.94 फीसद और 3 वर्ष के लिए 5.52 फीसद पर क्रमश: 100 और 3,000 करोड़ रुपए का कर्ज जुटाया है।