रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर (Raipur) में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया है। इस इस महोत्स में देश के कई राज्यों के नृत्य की झलकियां देखने को मिली, जिनमें मणिपुर, सिक्किम और राजस्थान नृत्य शामिल है। जनजातीय क्षेत्रों में झूम खेती होती थी, झाड़ियों को आग लगाकर साफ किया जाता था और खेती की जमीन तैयार होती थी। यह पूरी प्रक्रिया श्रमसाध्य थी, लेकिन उत्सव का प्रतीक भी थी, क्योंकि खेती ही लाइवलीहुड का अवसर प्रदान करती थी। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में मणिपुर के कलाकारों ने खरिमखरा नृत्य के माध्यम से झूम खेती की तैयारी को सजीव किया, इसे डांस आफ लाइवलीहुड भी कहा जाता है।

मणिपुर के कलाकारों द्वारा किए गए इस नृत्य में दिखाया गया कि, कैसे खेती के लिए उपयोगी जमीन चिन्हांकित होती थी, फिर इसे तैयार किया जाता था और बीज रोपा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को खरिमखरा नामक सुंदर नृत्य से मणिपुर के लोककलाकारों ने प्रस्तुत किया। यह खुखरई जिले के निवासी हैं।

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नृत्य की खास विशेषता यह है कि, इसमें घुटने में पहने हुए आभूषणों से तालबद्ध धुन निकलती है। स्टेप्स जितने सटीक बैठते हैं आभूषण से निकलने वाली धुन भी उतनी ही सटीक होती है। खरिमखरा नृत्य कृषि संस्कृति का उत्सव है और अपने श्रम के माध्यम से जमीन तैयार करने का अद्भुत उत्साह भी इससे झलकता है जो नृत्य रूप में और भी आकर्षक हो जाता है।

तमांग सेलो नृत्य सामान्य रूप से तमांग सेलो के नाम से जाना जाता है, जिसमें ऊर्जा और शक्ति के प्रदर्शन की भरमार रहती है। यह समूचे सिक्किम राज्य में एक बहुत ही लोकप्रिय नृत्य है जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही भाग लेते हैं। इसे लो चा अर्थात नव वर्ष /न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के दौरान किया जाता है। इस नृत्य में डम्पू के अतिरिक्त उपयोग में लाए जाने वाले वाद्य यंत्रों में मादल और तुंगना भी सम्मिलित हैं। इसमें उपयोग की जाने वाली 32 श्रेणी के वाद्य यंत्रों को भगवान बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।

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तमांग भारत के सिक्किम राज्य और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में रहने वाली एक मुख्य जनजाति है। यह जनजाति इन दोनों क्षेत्रों के नेपाली समाज का एक बहुत महत्वपूर्ण अन्य अंग है। जिन्होंने नेपाली प्रस्तुतिकारी कलाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया हुआ है। तमांग गीतों को तमान भाषा में हवाई कहा जाता है। ट्राइबल फेस्ट 2022 में सिक्किम से आए तमांग दल द्वारा अपने पारंपरिक वेशभूषा में एक अत्यधिक लोकप्रिय नृत्य प्रस्तुत किया जा रहा है। जिसे बोलचाल में डम्पू नाच बहु कहा जाता है। डम्पू वस्तुतः एक वाद्य यंत्र है जिसका इस नृत्य के अवसर पर उपयोग किया जाता है।