सिक्किम के विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजूकेशन मोड से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की डिग्री लेने वाले एक प्रार्थी को हिमाचल उच्च न्यायालय से तगड़ा झटका मिला है। हाईकोर्ट ने अंग्रेजी प्रवक्ता के पद के लिए उसे अयोग्य पाते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। 

यह भी पढ़ें : सिक्किम में चला प्लास्टिक के खिलाफ सख्त अभियान, लोगों की पहली पसंद बनी बांस की बोतल

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यूजीसी की ओर से कोर्ट के समक्ष दाखिल किए गए शपथपत्र से यह स्पष्ट होता है कि यूजीसी ने सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी को दूसरे राज्यों में डिस्टेंस एजूकेशन मोड से स्नातकोत्तर की डिग्री के लिए दाखिला देने के लिए स्वीकृति नहीं दी है।

जब यूजीसी को इस तरह की गतिविधियों के बारे में पता लगा तो यूजीसी ने नोटिस जारी कर विद्यार्थियों के अभिभावकों को यह बताने का प्रयास भी किया कि यूजीसी की मान्यता न होने के कारण इस तरह के विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करने का जोखिम न उठाएं। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी ने अंग्रेजी प्रवक्ता के पद को अनुबंध के आधार पर भरने के लिए आवेदन किया था। 

यह भी पढ़ें : Northeast India में अनदेखी जगहों का इन गर्मियों में बनाए प्लान

लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसे साक्षात्कार के दौरान इस कारण बाहर कर दिया गया कि उसकी स्नातकोत्तर की डिग्री हिमाचल प्रदेश में मान्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के मुताबिक उच्च न्यायालय इस तरह की परिस्थितियों में प्रार्थी को राहत देने के लिए सक्षम नहीं है।