राज्य सरकार की निष्क्रियता व अपरिपक्वता की वजह सिक्किम में संक्रमण के केस में वृद्धि हो रही है। यह आरोप प्रमुख विपक्षी दल सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने लगाया है। इस संबंध में एसडीएफ पार्टी के प्रवक्ता जेबी दर्नाल द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि लाकडाउन के इस संत्रास पूर्ण समय में राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमितों में वृद्धि होना खेद पूर्ण है।

एसडीएफ ने राज्य के फार्मा कंपनी तथा जल विद्युत कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों को उनकी नैसर्गिक अधिकार और सुरक्षा दिलाना पूर्ण रूप से विफल है। फार्मा कंपनी के कर्मचारी अपने अधिकार के लिए हड़ताल प्रदर्शन कर रहे है, जो दु:ख की विषय है। प्रत्येक कर्मचारियों को सुरक्षा देना ही प्रमुख जिम्मेदारी है राज्य सरकार की।

एसडीएफ पार्टी ने इस आपातकालीन स्थिति में काम कर रहे जल विद्युत उत्पादन परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी और फार्मा कंपनी के कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित कर नोटिफिकेशन जारी करने की माग की है। पार्टी ने फार्मा कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने की माग की। एसडीएफ पार्टी की माग है कि प्रत्येक कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों को राज्य सरकार और कंपनी की तरफ से 50 लाख रुपये की जीवन बीमा किया जाए, आपात कालीन स्थिति में कार्यरत कर्मियों का वेतन दोगुना किया जाना चाहिए।

पार्टी ने कोरोना से जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवार को सरकार व कंपनी की ओर से रू. एक करोड़ की क्षतिपूर्ति प्रदान करने के साथ ही उक्त परिवार के एक सदस्य को कंपनी में स्थायी नौकरी प्रदान करने की मांग की है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश के 80 करोड़ आर्थिक विपन्न नागरिकों कोप्रति व्यक्ति पाच किलो चावल, दो किलो चना, दो किलो मसूर की दाल, एक लीटर खाने का तेल मासिक रूप में वितरित करने की केंद्र सरकार की जनमुखी कार्यक्रम है। लेकिन सिक्किम सरकार ने इसे सफल ढंग में संचालित नहीं किया है।

एसडीएफ पार्टी ने केंद्र सरकार के द्वारा सहयोग के रूप में प्रदान किए गए दवाइयों स्वास्थ्य सामग्रियों में मुख्यमंत्री की फोटो लगाकर एसकेएम के कार्यकर्ता वितरित कर रहे हैं, ऐसे सस्ती प्रचार के प्रति एसडीएफ ने आपत्ति जताई है। पार्टी ने आशा कर्मियों के साथ ही आगनवाड़ी कर्मचारियों को भी उक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की माग की है।