RN KAO ने देशभक्ति की अंतिम हद तक देश की सेवा की थी। RAW के संस्थापक RN काव वो नाम हैं, जिसे देश के हर नागरिक और हर बच्चे को जानना चाहिए। 20 जनवरी को उन्हीं RN काव की 21वीं पुण्यतिथि थी। भारत के प्रसिद्ध 'स्पाईमास्टर' रामेश्वर नाथ काव का जन्म 10 मई 1918 को हुआ था।  काओ ने 1960 के दशक में दुनिया की सबसे एलीट खुफिया एजेंसियों में से एक रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) की स्थापना की थी।

भारत जिस दौर में जासूसी और खुफिया जानकारी की दुनिया में कदम रख रहा था, उस दौर में काव ने भारत को इस नई दुनिया में एक नई राह दिखाई और कामयाबी की कई इबारत लिखीं। काव का जन्म बनारस में हुआ था। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीए और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए किया था। काव इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में लॉ पढ़ाथे थे, जब 1940 में उन्होंने सिविल सर्विस एग्जाम क्लियर किया और इंडियन इंपीरियल पुलिस (आज के समय की भारतीय पुलिस सेवा) जॉइन कर ली। 

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काव को 1947 के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो में प्रतियुनिक्ति पर लाया गया। IB के शुरुआती दिनों में उन्होंने एजेंसी के डेवलपमेंट में अपना योगदान दिया। कुछ समय के लिए वह तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सिक्योरिटी इंचार्ज भी रहे। उन्होंने 1950 के दशक में 'कश्मीर प्रिंसेज' जैसे कुछ प्रसिद्ध मामलों को संभाला। 

1968 में उन्हीं की अध्यक्षता में RAW की स्थापना हुई। बतौर रॉ चीफ उन्होंने 1971 में बांग्लादेश की आजादी में अहम भूमिका निभाई। काव प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेहद भरोसेमंद अधिकारी थे। इंदिरा के साथ अपनी नजदीकियों के चलते वह विपक्ष के निशाने पर भी रहे। जब देश में इमरजेंसी लगी तो सबसे पहला शक काव पर ही गया, हालांकि काव ने निजी तौर पर इंदिरा गांधी को इमरजेंसी जैसे कदम से बचने के लिए कहा था। 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार आई, तो वह निशाने पर आ गए। जनता पार्टी सरकार के नेताओं को शक था कि इमरजेंसी के दौरान काव के इशारे पर उनकी जासूसी की गई। उनको हटाया जाए, इससे पहले ही उन्होंने चुपचाप इस्तीफा दे दिया। बाद में विस्तृत जांच हुई, इस जांच में काव और R&AW को क्लीन चिट मिली।

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1980 में जब इंदिरा गांधी की वापसी हुई तो वह उनके सुरक्षा सलाहकार बने। वह राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके भी सलाहकार रहे। काव ने इस दौरान एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) की भी स्थापना की। जासूसी जगत की दुनिया में उनकी टीम को 'काव-बॉयज' कहा जाता था। काओ के बारे में एक बेहद कम चर्चित तथ्य यह है कि उन्होंने अपने जीवन की घटनाओं को एक टेप रिकॉर्डर में रिकॉर्ड किया था और चाहते थे कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें जनता के लिए जारी किया जाए। RN काव के जीवन पर लिखी एक किताब से पता चलता है कि कैसे उनके निर्देशन में एजेंसी ने दिसंबर 1972 और मई 1975 के बीच सिक्किम के शासक के खिलाफ 27 महीने लंबा एक निर्मम ऑपरेशन चलाया। किताब में रणनीतिक मामलों के विश्लेषक और लेखक नितिन ए गोखले लिखते हैं कि चोग्याल, या सिक्किम के तत्कालीन राजा (पल्डेन थोंडुप नामग्याल) भारत-सिक्किम संधि को संशोधित करने के लिए भारत पर दबाव बना रहे थे। 

उनका तर्क था कि यह एक संरक्षित राज्य है और वह भूटान जैसे एक अलग राज्य बनाने की महत्वाकांक्षा रखते थे। दिसंबर 1972 के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने काव से पूछा, 'क्या आप सिक्किम के बारे में कुछ कर सकते हैं?' इसके बाद काव और उनकी टीम ने 27 महीने तक कड़ी मेहनत की मई 1975 में सिक्किम भारत का हिस्सा बन गया।