आजादी के बाद अब सैन्य इतिहास को लिखना लेखकों की पहली पसंद बना हुआ है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) डोकलाम विवाद के दौरान मीडिया में सबसे ज्यादा चर्चा साल 1962 के युद्ध पर हुई, जबकि 1967 में नाथुला और चौला में भारत ने चीन को हराकर शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन इसका कहीं भी जिक्र नहीं हुआ। सबसे अधिक हैरानीजनक बात सामने आई कि 1967 की जंग के संबंध इतिहासकारों और रक्षा विशेषज्ञों को भी ज्यादा जानकारी नहीं थी। 

मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट के दूसरे दिन चर्चा में हिस्सा लेते रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने कहा कि मुझे ईस्ट कमांड में 1978 में काम करने का मौका मिला तो मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि 1967 की इस अहम जंग संबंधी लोगों को बहुत कम जानकारी थी। जनरल सगत सिंह ने चीनी हमले के बाद बिना किसी देरी के जवाबी कार्रवाई कर दी थी। उन्होंने इस मौके पर कहा कि मौजूदा समय में भारत को चीन के साथ लगते क्षेत्र में अपनी ताकत को और मजबूत करना चाहिए। भारत हर क्षेत्र में चीन की बराबरी करता है, वह चाहे ताकत की बात हो या तकनीक की। सीमा पर मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर समय की जरूरत है। 

मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल- 2020 के दूसरे दिन की शुरुआत पराबल दासगुप्ता की वॉटरशैड 1967-इंडियाज फॉरगेटन विक्ट्री ओवर चाइना पर विस्तृत चर्चा से हुई। इस सत्र के संचालक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एनएस बराड़ थे। दासगुप्ता ने बताया कि जनरल सगत सिंह द्वारा 1965 में ईस्ट जोन की कमांड संभालने के बाद चीन के साथ लगते सभी भारतीय इलाकों की पहचान की और पेट्रोलिग शुरू करवाई और यह यकीनी बनाया कि संकट की घड़ी में भारतीय क्षेत्र की निशानदेही करना आसान हो, जिससे चीन उस पर अपना अधिकार न कर सके। जंग की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि चीनी सरकार सिक्किम पर कब्जा करने के लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाकर इस्तेमाल करना चाहती थी। इसलिए चीन ने पाकिस्तान को अपने कब्जे अधीन कश्मीर में सड़कें बनाने के लिए उकसाया, जिस पर भारत द्वारा एतरा•ा किया गया।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जेएस चीमा ने कहा कि इस जीत ने जहां भारतीय सेना में उत्साह भरा था, वहीं, चीन को भारत के साथ समझौता करने के लिए मजबूर करने के साथ-साथ सिक्किम को भारत का हिस्सा भी मनवाने के लिए मजबूर किया। इस जीत ने एशिया के क्षेत्र में बड़ी तबदीली लाई, जिसके अंतर्गत 1971 में बांग्लादेश बना और इस लड़ाई में चीन ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया।