हरियाणा सरकार ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके तहत सिक्किम माडल के आधार ही स्टे होम पॉलिसी बनाने पर विचार चल रहा है। जिले में शिवालिक की पहाड़ियों से सटे वन क्षेत्र के आसपास के गांवों में इस पॉलिसी को लागू किया जा सकता है। जिसमें ग्रामीणों को सरकार की ओर कुछ आर्थिक मदद दी जाएगी। ग्रामीण खुद ही मकान व ढाबा तैयार करेंगे और इसका सीधा लाभ भी उन्हें ही मिलेगा।


आज की भागदौड़ भरी जिदगी में सुकून के पल पाने के लिए लोग पहाड़ी व वन क्षेत्र के एरिया का रूख करते हैं। ऐसे में केरल, उत्तराखंड, सिक्किम जैसे राज्यों में जाने वाले टूरिस्टों के माध्यम से ग्रामीणों को आमदनी होती है। सिक्किम में काफी हरियाली है। वहां पर लोगों ने अस्थायी मकान तैयार किए गए हैं। जिन्हें टूरिस्टों को किराये पर दिया जाता है। बाहर से आने वाले लोग यहां पर हरियाली व प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं। जिले में भी काफी एरिया जंगल व पहाड़ी क्षेत्र का है। ऐसे में यहां पर भी स्टे होम पॉलिसी लागू की जा सकती है। जिले में 24 हजार एकड़ वन एरिया है। इसमें 11 हजार 700 नेशनल पार्क व 12 हजार एकड़ सैंचरी वन एरिया है।


यमुनानगर जिले में छछरौली, प्रतापनगर, कलेसर, आदिबद्री, हथनीकुंड, बनसंतौर में काफी वन क्षेत्र व पहाड़ी एरिया है। काफी संख्या में पर्यटक भी यहां पर आते हैं। ऐसे में यहां पर ग्रामीण टूरिज्म का अच्छा विकल्प है, लेकिन सरकार होटल बनाने के पक्ष में नहीं है। बनसंतौर में चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में हट बनाए गए थे, लेकिन उनका प्रयोग नहीं हो सका। अब वह जर्जर हालत में है। हालांकि टूरिज्म मंत्री कंवरपाल गुर्जर का मानना है कि यदि किसी को होटल में रुकना है, तो वह शहर में भी रुक सकता है। ग्रामीण व पहाड़ी एरिया का परिवेश महसूस करना है, तो उन्हीं की तरह से रहना चाहिए।


टूरिज्म मंत्री कंवरपाल गुर्जर का कहना है कि सरकार की कोशिश है कि लोगों तक सीधा लाभ पहुंचे। यमुनानगर समेत प्रदेश में कई जगह हरियाली से भरपूर हैं। जहां पर काफी संख्या में पर्यटक भी आते हैं। हमारी कोशिश है कि यहां ग्रामीण ही इस दिशा में आगे बढ़े। ताकि ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा मिल सके। योजना है कि ग्रामीणों को सरकार बिना ब्याज के कुछ पैसा दें, कुछ पैसा खुद ग्रामीण लगाकर आवास तैयार करें।