सिक्किम में मुख्यमंत्री पीएस तमांग के नेतृत्व वाली सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा सरकार ने कोरोना वायरस के कारण सामने आये आर्थिक संकट से निपटने के मद्देनजर मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों के वेतन में कटौती करने का निर्णय लिया है। 

मुख्यमंत्री पीएस तमांग के मंत्रिमंडल ने कोरोना वायरस के कारण गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के प्रयास के तहत एक वर्ष के लिए मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों के वेतन में 35 फीसदी कटौती करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा राज्य में नियमित/वर्क-चाज्र्ड/मस्टर रोल/ऐडहोक/कॉसोलिडेटेड पे/अस्थायी आधार पर होने वाली नियुक्तियों पर छह महीने के लिए प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके अलावा अन्य वीआईपी खर्चो में भी कटौती की गई है। मरम्मत, रखरखाव और इस तरह के अन्य खर्चों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। नये वाहन और लैपटॉप खरीदने की अनुमति नहीं होगी।

गौरतलब है कि देश में भले ही कोरोना को कोहराम हो लेकिन पूर्वोत्तर का एक राज्य ऐसा भी है, जहां अभी तक कोरोना ने अपनी दस्तक नहीं दी है। दरअसल ये राज्य सिक्किम है। सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से जब इस सफलता के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि जब दुनिया कोरोनावायरस को महामारी घोषित करने पर विचार कर रही थी, तब सिक्किम ने सुरक्षा के उपाय करना शुरू कर दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से चीन में वायरस की खबरें आना शुरू हुईं, हम तभी से सतर्क हो गए। सिक्किम राज्य की सीमा भूटान और नेपाल के अलावा चीन से भी लगी हुई है। जनवरी में भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला दर्ज होने के बाद, हमने फरवरी के बाद से ही चार मुख्य चेकपोस्टों में राज्य में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी शुरू कर दी। सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी करने के लिए हमने केंद्र सरकार के आदेश का इन्तजार नहीं किया। यही वजह है कि सिक्किम में अब तक एक भी पॉजिटिव केस नहीं आया है।