कोरोना महामारी में राजनीतिक नफा नुकसान को भूलकर सबको साथ मिलकर काम करना होगा। यह कहना है भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और हमरो सिक्किम पार्टी के संस्थापक बाईचुंग भूटिया का। भूटिया सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र के वार्ड छह में मेयर के साथ जरूरतमंदों के बीच राशन सामग्री वितरण करने पहुंचे थे। 

भूटिया ने कहा कि संकट बहुत गंभीर है, इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। ऐसे में देश में एक ऐसा राज्य भी है, जहां कोरोना प्रवेश भी नहीं कर सका। यह राज्य कोई और नहीं उनका गृह राज्य सिक्किम है। सिक्किम में अब तक कोरोना का एक भी पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। इसका कारण लोगों को समझना होगा। राज्य में प्रशासन और आम लोगों की जागरूकता ने लोगों को एक तरह के सुरक्षा कवच से ढंक रखा है। चीन की सीमा से सटे होने के नाते सरकार ने कोरोना के खतरे को पहले ही भांप लिया था और उसी हिसाब से तैयारियां भी कर ली थीं। 

उन्होंने कहा कि यहां के लोग शुरुआत से ही पूरी तरह अनुशासित रहे। सिक्किम के लोगों ने कोरोना से संबंधित सभी दिशा निर्देशों का जिम्मेदारी से पालन किया। भारी नुकसान के बावजूद जब 14 मार्च को होटल खाली कराने के निर्देश मिले तो लोगों ने दो दिन में सारे होटल खाली करा दिए। इतना ही नहीं स्थानीय लोग घर के अंदर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन करते हैं। घर में भी अलग-अलग सोते हैं। सिक्किम के सभी प्रवेश केन्द्रों पर 27 जनवरी से स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई थी। पीएम मोदी के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से पहले ही राज्य में कोरोना को देखते हुए लॉकडाउन कर दिया गया था। सिक्किम में मौजूद लोगों की हालिया विदेश यात्रा की डिटेल खंगाली गईं, उन्हें तत्काल क्वारंटाइन किया गया। इसके साथ ही प्रशासन ने संदिग्धों को घर में ही आइशोलेट रहने के निर्देश दिए। 

उन्होंने आगे कहा कि सिक्किम की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है। इसके बावजूद सरकार ने कड़े फैसले लिए। सरकार ने कोरोना के खतरे को देखते हुए शुरुआत में ही विदेशियों के साथ-साथ अन्य राज्यों के पर्यटकों के लिए भी सीमाएं सील कर दीं। यह सरकार का एक बेहद कठोर फैसला था। जिसकी वजह से सिक्किम कोरोना से बचा हुआ है। कहने का अर्थ यह है कि सरकार के कठोर निर्णय और उसमें जनता की भगीदारी शत -प्रतिशत जरूरी है। इसके बिना इसे सफल बनाना संभव नहीं है।