यहां से 18 किलोमीटर दूरी स्थित तिंगदा लिंगचो ग्राम पंचायत इकाई में निíमत पुल के क्षतिग्रस्त होने से उक्त क्षेत्र का संपर्क राजधानी गंगटोक से टूट गया है। उत्तर सिक्किम के कवि लुंचोक विधानसभा समष्टि अंतर्गत गैरी गाव वार्ड में निर्मित उक्त पुल बहने से स्थानीय लोगों को काफी क्षति हुई है। 5 जून की रात को हुई भारी बारिश से राते नदी में बना उक्त पुल बह गया। 

इस पुल का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हुआ था। गैरी गाव में ज्यादातर शेरपा समुदाय के लोग रहते हैं। जिनका जीविकोपार्जन कृषि है। यह सडक स्थानीय लोगों के लिए एक जीवन रेखा थी। सड़क मार्ग अवरुद्ध होने के बाद लोगों को उत्तर सिक्किम के राष्ट्रीय राजमार्ग होकर उत्तर जिला के मुख्यालय मंगन और राजधानी गंगटोक आना पड़ेगा। इस गाव से उत्तर सिक्किम राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने के लिए करीब डेढ़ घटे की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। अगर इस गाव में कोई आपातकालीन स्थिति आई तो उनको डेढ़ घटा पहाड़ की चढ़ाई करनी होगी।

यहा की स्थिति जानने के लिए पहुंची पत्रकारों की टोली से स्थानीय ग्राम पंचायत सभापति पासाग शेर्पा ने कहा कि यह पुल स्थानीय जनता के लिए एक जीवन रेखा थी। यह सड़क निर्माण कार्य पीएमजीएसवाई के तहत साल 2012 से निर्माण कार्य आरंभ किया गया था। साल 2017 में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 2018 से यह पुल सुचारु हुआ था। लेकिन करीब तीन साल के अंदर यह चकनाचूर हुआ। उनका कहना है कि यह पुल पानी के कारण कम और यहा हुए भ्रष्टाचार के कारण बहा है। इस पुल का निर्माण करते समय ग्रामीणों ने यहा के अभियंता और ठेकेदार से भी बात किए थे। लेकिन ग्रामीणों की बात किसी ने नहीं सुनी। एक करोड़ 51 लाख 24 हजार रुपये की लागत में निर्मित इस पूल ने केवल तीन साल ही सेवा दिया।

मीडिया से बात करते हुए स्थानीय जिला पंचायत सदस्य निमा ह्लामु शेरपा ने कहा कि इस सड़क के अभाव में पहले भी बहुत लोगों ने जान गंवाई है। राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचते-पहुंचते लोगों की जान जाति है। इस सड़क के निर्माण के बाद स्थानीय लोगों को कुछ राहत मिली थी, अब यह भी बंद होगया। स्थानीय एक युवा ने कहा कि अब यहा के लोगों के लिए सरकार को वैकल्पिक रास्ता देख लेना चाहिए। उनकी माग है कि स्थानीय पीएमजीएसवाई सड़क को उत्तर सिक्किम राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने का विकल्प है। सरकार इस माग को जल्द पूरी कर दें।