भाई और बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार आज मनाया जा रहा है। श्रावण मास का अंतिम सोमवार भी है और इसी दिन पूर्णिमा भी है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 9.30 मिनट से शुरू हो गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थसिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इस बार रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ काम जल्दी सिद्ध होते हैं। सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक भद्रा काल रहेगा। इसके बाद बहनें दिनभर अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई के हाथ में राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, लेकिन कई बार अंजाने में बहनें शुभ मुहूर्त देखे बिना ही अपने भाई को ऐसी राखियां बांध देंती है, जिससे उन पर उस पर मुसीबत आ सकती है। राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। पौराणिक कथाओं की मानें तो रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांध दी थी, इसलिए रावण का विनाश हो गया। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा काल है। इसके अलावा राखी बांधते समय इन बातों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए-

बहनों को भाई की कलाई में कभी भी खंडित राखी नहीं बांधनी चाहिए। कई बार बाजार से राखियां लाने में टूट जाती हैं और हम उसे वापस जोड़कर सही कर लेते हैं, लेकिन इस तरह की राखियां को बांधने से बचना चाहिए।भाई की कलाई पर प्लास्टिक की राखी बिल्कुल न बांधे। ऐसा इसलिए भी प्लास्टिक को अशुद्ध माना जाता है। साथ ही प्लास्टिक को केतु का पदार्थ माना जाता है और ये अपयश को बढ़ाता है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन प्लास्टिक की राखियों से बचें। 

पहले बहनें रेशम की राखियां ही भाइयों की कलाई पर बांधती थी। अब ट्रेंड बदल गया है। जो भी राखियां दिखने में आकर्षित लगती हैं, वो खरीद लेते हैं। हिंदू धर्म में कई सारे चिंह्नों को अशुभ बताया गया है। ऐसे चिंह्नों से बनीं राखियां बांधने से संकट के बादल मंडरा सकते हैं या वह दिन अशुभ हो सकता है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के हाथ में काले रंग की राखी कभी भी नहीं बांधनी चाहिए। शास्त्रों की मानें तो काले रंग का सीधा संबंध शनि देव से होता है। शनि देव को हमेशा हर काम में विलम्ब करने वाला ग्रह माना जाता है। सनातन धर्म में काले रंग को अशुभ माना जाता है।