त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने कहा कि सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते क्रेज के बाद परंपरागत मीडिया के यूजर्स में कमी हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रवृत्ति से बचना चाहिए। उन्होंने साथ ही मीडियाकर्मियों से न्यूज में फैक्ट देने का आग्रह किया, भले ही वह बात सरकार के खिलाफ ही क्यों न बोली जाए? बुधवार को अगरतला में त्रिपुरा न्यूजपेपर सोसाइटी के पहले वार्षिक राज्य सम्मेलन में पहुंचे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने कहा, 'पहले लोग अखबारों पर ज्यादा विश्वास करते थे। यहां के एक वक्ता ने कहा कि मौजूदा अखबार के पाठकों की संख्या महज 25 फीसदी रह गई है। टीवी के आने से 45 फीसदी दर्शकों की संख्या घटी है। अब अखबार पढ़ने का चलन घट गया है। सोशल मीडिया और समय की कमी के कारण लोग अब सब कुछ अपने मोबाइल पर ही देख लेते हैं।'

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साहा ने मीडियाकर्मियों से कुछ व्यक्तियों के साथ निकटता बनाए रखने के बजाय व्यक्तित्व बनाए रखने पर जोर दिया। सम्मेलन में उन्होंने कहा, 'अगर इसकी आवश्यकता है तो पत्रकारों को हमारे खिलाफ भी सच लिखना चाहिए। अगर कहानी सकारात्मक लिखी गई है, तो इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। आप (पत्रकार) हमारी गलतियों को सुधार सकते हैं। मैं अपने कैबिनेट सहयोगियों और पार्टी कार्यकर्ताओं से तदनुसार पालन करने के लिए कहूंगा। लेकिन आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पूर्ववर्ती सरकार की स्थिति वापस न आ जाए।'

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समाचार पत्रों की सामग्री का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में समाचार कुछ शब्दों के प्रयोग के कारण विचार लगते हैं। 'यदि आप विचार साझा करना चाहते हैं, तो संपादकीय लिखें। समाचार वाले समाचार वांछनीय नहीं हैं।' सम्मेलन में त्रिपुरा न्यूजपेपर सोसाइटी के अध्यक्ष सुबल कुमार डे ने पिछले 4.5 वर्षों में पत्रकारों पर हुए हमलों पर प्रकाश डाला, जहां कम से कम 42 पत्रकारों पर हमले हुए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।