अगरतला : 12 साल के लंबे इंतजार के बाद सिपाहीजला चिड़ियाघर में बादल वाले तेंदुओं के स्वस्थानी संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को परिवार में तेंदुओं के दो नए जोड़े के रूप में सफलता दिखाई दे रही है। हाल ही में लाये गए शावकों की गिनती के बाद अब चिड़ियाघर में कुल 10 बादल वाले तेंदुए हो गए हैं। मुख्य वन्यजीव वार्डन प्रवीण अग्रवाल ने इस काम को सिपाहीजला चिड़ियाघर के साथ-साथ वन्यजीव अभयारण्य के लिए एक बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा की तेंदुए के शावकों को गुरुवार को सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद चिड़ियाघर के अधिकारियों को सौंप दिया गया। दोनों शावक स्वस्थ हैं और वे अच्छी तरह से तालमेल बिठा रहे हैं।

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सिपाहीजाला के जिला वन अधिकारी प्रीतम भट्टाचार्जी ने कहा, “इन-सीटू प्रजनन कार्यक्रम पहली बार 2010 में शुरू किया गया था। तब से, हम बड़ी तेंदुओं के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दुर्भाग्य से हमें बहुत कम सफलता प्राप्त फजा पाई। इस वर्ष प्रजनन कार्यक्रम सफल रहा। हमें मिले दो शावकों में से एक नर और दूसरा मादा है।” मादा शावक का नाम जुलेखा और नर शावक का नाम अंतरीप रखा गया। डीएफओ ने कहा, "उन्हें सिपाहीजला बायोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स में 2 दिन की उम्र से 4 महीने तक हाथ से पाला गया था।"

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भट्टाचार्जी ने कहा कि चिड़ियाघर में अपने परिवार के साथ रहने वाले नवजात शिशुओं की कुल संख्या 10 हो गई है। अब 3 मादा और सात नर तेंदुए हैं। चिड़ियाघरों में मादा शावक का जन्म एक दुर्लभ घटना है। इस प्रजनन कार्यक्रम को बड़ी सफलता में बदलने के लिए पूरी चिकित्सा टीम ने अथक परिश्रम किया है। शावक अब चार महीने के हो गए हैं और वे चिड़ियाघर के माहौल के साथ विकसित हुए हैं। बादल वाले तेंदुओं के अलावा यहां चश्मे वाले लैगूर और सुअर की पूंछ वाले मकाक के लिए ऐसे विशेष संरक्षण कार्यक्रम भी चल रहे हैं। त्रिपुरा वन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों लुप्तप्राय जानवरों की आबादी में भी काफी वृद्धि हुई है।