त्रिपुरा उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार से एक कैदी के अगले परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा है, जिनकी मौत जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से हुई थी। 

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सड़क दुर्घटना में दोषी पाए जाने के बाद सिपाहीजला जिले के केंद्रीय सुधार गृह में छह साल के कठोर कारावास की सजा काट रहे चंदन डे की जून 2017 में इंसेफेलाइटिस से मौत हो गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता पुरुषोत्तम रॉय बर्मन के अनुसार डे के परिवार के सदस्यों ने एकमात्र रोटी कमाने वाले की मौत के लिए न्याय की मांग करते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय में परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले रॉय बर्मन ने कहा कि जेल जाने से पहले एक ड्राइवर के रूप में काम करने वाले डे को बीमार पड़ने के बाद अगरतला के जीबीपी अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने खराब हालत के चलते उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में रेफर कर दिया। हालांकि कैदी को कोलकाता नहीं ले जाया गया और कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो गई।

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एकल पीठ के न्यायमूर्ति एस तलापता ने मामले की सुनवाई के बाद जनवरी 2018 में डे की असामयिक मौत के लिए जेल अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था और सरकार से पीड़ित के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा था। हालांकि, जेल अधिकारियों ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अदालत की खंडपीठ का रुख किया। रॉय बर्मन ने कहा कि न्यायमूर्ति अरिंदम नाथ और न्यायमूर्ति एस चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने 20 मई को एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा और सरकार से मुआवजे का भुगतान करने को कहा।