चुनाव आयोग (ईसीआई) की ओर से नियुक्त तीन विशेष पर्यवेक्षक त्रिपुरा में चल रही चुनावी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोमवार को यहां पहुंचे। ईसीआई ने शुक्रवार को कांग्रेस की एक रैली पर हमले में 32 कार्यकर्ताओं के घायल होने और विपक्षी टिपरा मोथा के एक समर्थक की हत्या की रिपोर्ट मिलने के बाद शुक्रवार को इन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की थी। कथित तौर पर राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी समर्थित उपद्रवियों ने त्रिपुरा विधानसभा के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद हिंसा तेज कर दी है।

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राज्य के सूचना मंत्री सुशांत चौधरी, अग्निशमन और आपातकालीन सेवा मंत्री राम प्रसाद पॉल तथा कृषि मंत्री प्राणजीत सिंघा रॉय पर विपक्षी दलों के खिलाफ कार्यकर्ताओं को खुले तौर पर भड़काने का आरोप लगाया गया है। चुनाव की घोषणा और ईसीआई की ओर से निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण चुनाव के आश्वासन के कुछ ही घंटों के भीतर विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, कांग्रेस और टिपरा मोथा पर कम से कम पांच हिंसक हमलों की सूचना मिली थी। कई जगहों पर माकपा के पार्टी कार्यालयों और उनके समर्थकों के घरों को आग के हवाले भी कर दिया गया है। यहां तक कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ अजय कुमार पर दिनदहाड़े सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हमला किया गया।

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चुनाव अधिकारियों ने कहा कि हिंसा के जवाब में, ईसीआई ने कर्नाटक के 1985 बैच के एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेंद्र त्रिपाठी को राज्य में चुनाव अधिकारियों के प्रशासनिक कामकाज की निगरानी करने और सभी राजनीतिक दलों के लिए एक समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए एक सामान्य विशेष पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है। ईसीआई ने राज्य में पुलिस के सक्रिय कामकाज और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की उचित तैनाती सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश के 1984 बैच के एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में भी नियुक्त किया है क्योंकि त्रिपुरा पुलिस पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में भूमिका निभाने और उन अपराधियों को संरक्षण देने में पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है जिन पर विपक्षी दल के समर्थकों पर हिंसा करने का आरोप लगाया गया है।

वोट खरीदने के लिए नकदी, शराब और अन्य प्रलोभनों के बड़े पैमाने पर जमावड़े के आरोप के आधार पर, ईसीआई ने 1983 बैच के आईआरएस अधिकारी बी मुरली को विशेष व्यय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है ताकि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अनैतिक प्रथाओं को रोका जा सके, जिन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पिछले चुनावों के दौरान भारी मात्रा में जब्ती की है। आगमन पर, विशेष पर्यवेक्षकों ने कुछ इलाकों का दौरा किया और जमीनी स्थिति को समझने के लिए लोगों से बातचीत भी की। केंद्रीय पर्यवेक्षक मंगलवार सुबह नागरिक और पुलिस प्रशासन दोनों के राज्य-स्तरीय चुनाव अधिकारियों से मिलेंगे, इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जिला-स्तरीय नोडल अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे।