त्रिपुरा चाय विकास निगम (टीटीडीसी) ने चाय बोर्ड ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों के साथ हुई विक्रेताओं की बैठक में चाय नीलामी केंद्र स्थापित करने की योजना की वकालत की । त्रिपुरा के चाय उत्पादकों ने दक्षिण भारत, दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और जोरहाट से बड़ी संख्या में विक्रेताओं को इस बैठक में बुलाया और राज्य में चाय व्यवसाय पर चर्चा की। 

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इसी दौरान उन्होंने टीटीडीसी से वैश्विक ग्राहकों को पूरा करने के लिए ई-नीलामी, ई-खरीद, ई-मार्केटप्लेस और ई-सेलिंग में राज्य की संसाधित चाय को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। टीटीडीसी के अध्यक्ष संतोष साहा ने आशा व्यक्त की कि एक चाय नीलामी केंद्र जल्द ही पूरा होने की संभावना है, क्योंकि त्रिपुरा के चाय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए चाय नीलामी केंद्र स्थापित करने के लिए दोनों ओर से सहयोग देने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने बंगलादेश को चाय निर्यात करने और राज्य के लिए एक चाय नीलामी केंद्र स्थापित करने की पहल की है। वर्ष 1916 त्रिपुरा में चाय उद्योग की शुरुआत की गई, लेकिन वर्ष 2018 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद ही बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साहा ने कहा कि हमने चाय का एक स्थानीय ब्रांड त्रिपुरेश्वरी पेश किया है, जिसकी आपूर्ति राज्य भर में एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन की दुकानों के माध्यम से की जा रही है। त्रिपुरेश्वरी चाय की गुणवत्ता ने चाय प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया है, जिसने निगम को खुदरा बाजार के लिए एक प्रीमियम ब्रांड पेश करने पर जोर दिया है। 

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त्रिपुरा देश का पांचवां चाय उत्पादक राज्य बन गया है, जहां 10 लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय का उत्पादन किया जाता है। उन्होंने कहा कि 39 निजी सहित 54 चाय बागान सालाना 80 लाख किलोग्राम चाय पत्ती का उत्पादन कर रहे हैं और अब राज्य के लोगों को एक सस्ती कीमत पर उनके उत्पादों का स्वाद मिलेगा। त्रिपुरा को उसके गुणवत्तापूर्ण चाय उत्पादन के लिए जाना जाता है और पिछले साढ़े चार वर्षों से इसे भाजपा-आईपीएफटी सरकार के तहत बढ़ावा मिला है। सरकार हाल ही में शुरू की गई मुख्यमंत्री चा श्रमिक कल्याण योजना के तहत चाय श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।