ईटानगर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने निर्णय लेने की प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता बढाये जाने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को और संवेदनशील बनाये जाने की जरूरत पर बल देते हुए गुरुवार को कहा कि ऐसा करने से लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का भरोसा मजबूत होगा। यहां अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में दोरजी खांडू सभागार में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ(सीपीए) के भारतीय क्षेत्रीय जोन की तीसरी बैठक को सम्बोधित करते हुए बिरला ने कहा 'आज हमारे लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किस तरह से पूरी क्षमता के साथ सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और विधिक माहौल तैयार किया जाए कि समाज का हर हिस्सा शासन प्रक्रिया में भागीदारी कर पाये। 

लोग संसद, विधानसभा और पंचायतों का हिस्सा बनें। हमारा ध्यान मुख्य रूप से निर्णय लेने की प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर साथ ही इन संस्थाओं को लोगों की परेशानियों के प्रति और संवेदनशील बनाने पर होना चाहिए ताकि लोगों का लोकतांत्रिक संस्थाओं में भररोसा और मजबूत हो सके। देश के पूर्वोत्तर हिस्से की बात करते हुए बिरला ने कहा कि इस क्षेत्र की अलग तरह की राजनीतिक और भौगोलिक स्थिति के कारण इसकी विकास यात्रा भी बहुत चुनौतीपूर्ण रही। इतना विकास होने के बावजूद अब भी अधसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, संपर्क और कई अन्य कारणों से बहुत कुछ होना बाकी है। हमें इन सभी क्षेत्रों का भी पर्याप्त विकास करना है। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र द्वारा इस क्षेत्र के विकास के लिए दिये जा रहे मुख्य ध्यान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा 'हमें यह सोचना होगा कि इस क्षेत्र में विकासीय योजनाओं लोगों की भागीदारी और सहयोग को कैसे बढ़ाया जाए कि यहां की नृजातीय विरासत, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को बनाये रखते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार कैसे मिले और किस तरह से इस क्षेत्र की समृद्धि सुनिश्चित की जाए। 

ओम बिरला ने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर का इलाका लंबे समय तक अतिवाद और आतंकवाद से प्रभावित रहा लेकिन आज लोग जान गये हैं कि अतिवादिता किसी समस्या का समाधान नहीं है। उत्तर पूर्वी क्षेत्र में बदलाव आ रहा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि उत्तर पूर्व का क्षेत्र भारत के विकास का इंजन है और इसी कारण इस क्षेत्र की अधसंरचना विकास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले केंद्र सरकार ने किये हैं और बड़ी तेजी के साथ उन्हें लागू भी किया गया है। उत्तर पूर्व देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है कि जिसके समेकित विकास के लिए केंद्र सरकार ने एक अलग से मंत्रालय का गठन किया है। 

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सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत केंद्र सरकार इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। केंद्रीय मंत्रालयों को अपने बजट का 10 प्रतिशत उत्तर पूर्व क्षेत्र में खर्च करने के निर्देश दिये गये है। इस तरह के फैसलों के नतीजें अब दिखाना शुरू हो गये हैं। उन्होंने कहा 'इस क्षेत्र और यहां के लोगों की समृद्धि के लिए सरकार जो जो उपाय कर रही है उनसे इस क्षेत्र के लोगों के लिए समृद्धि का एक नया दौर शुरू होगा। इस बात को लेकर मुझे जरा भी अंदेशा नहीं है कि उत्तर पूर्व एक सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ रहा है।' उन्होंने कहा कि इस बैठक के जरिए न केवल उत्तर पूर्व बल्कि पूरे देश में यह संदेश जायेगा कि हम अपनी लोकतांत्रकि संस्थाओं को किस तरह से जनकल्याण के लिए अधिक से अधिक रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं।